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“दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा मंथन: हरिद्वार में जुटे देशभर के फार्मा विशेषज्ञ, नई फार्माकोपियल स्टैंडर्ड से मरीजों को मिलेगी और सुरक्षित दवा”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इकाई इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) द्वारा जनवरी 2026 से लागू किए गए नए फार्माकोपियल मानकों को लेकर हरिद्वार के सिडकुल में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित किया गया। इंडियन फार्माकोपिया कमीशन और एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेशभर की दवा निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों, गुणवत्ता विशेषज्ञों और नियामक अधिकारियों ने भाग लिया।

सिडकुल स्थित एकम्स टाउनहॉल में आयोजित इस साइंटिफिक कॉन्क्लेव का विषय था— “फार्माकोपियल मानकों और गुणवत्ता के माध्यम से दवा उत्पादन को मजबूत बनाना।” सम्मेलन का उद्देश्य नई गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं, आधुनिक चुनौतियों और दवा निर्माण में बढ़ती वैश्विक अपेक्षाओं के अनुरूप उद्योग जगत को जागरूक करना था।

 नई स्टैंडर्ड पर उद्योग और विशेषज्ञ आमने-सामने

कार्यक्रम में इंडियन फार्माकोपिया कमीशन के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनवरी 2026 से लागू नई स्टैंडर्ड और उनके व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बदलते वैज्ञानिक परिवेश और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखते हुए फार्माकोपियल मानकों को लगातार अद्यतन किया जा रहा है ताकि मरीजों तक सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाएं पहुंच सकें।विशेषज्ञों ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े दवा उत्पादक देशों में शामिल है और ऐसे में दवा गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। नए मानकों के माध्यम से दवा निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

 अशुद्धियों को कम करने पर विशेष जोर

सम्मेलन के दौरान दवाओं में मौजूद संभावित अशुद्धियों (Impurities) और उनके नियंत्रण पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक समय में दवा निर्माण तकनीक लगातार विकसित हो रही है,लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि उत्पादन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।

चर्चा के दौरान यह भी बताया गया कि नई फार्माकोपियल स्टैंडर्ड दवा कंपनियों को अशुद्धियों की पहचान, मूल्यांकन और नियंत्रण के लिए अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी दिशा-निर्देश प्रदान करती हैं। इससे मरीजों तक पहुंचने वाली दवाओं की शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

 मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी दवा की गुणवत्ता का सीधा संबंध मरीजों के स्वास्थ्य से होता है। यदि दवाओं में गुणवत्ता संबंधी कमी रह जाए तो इसका असर उपचार की प्रभावशीलता पर पड़ सकता है। इसी कारण नई स्टैंडर्ड में गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण प्रक्रियाओं को अधिक मजबूत बनाया गया है।वक्ताओं ने कहा कि फार्मास्युटिकल उद्योग का अंतिम उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद दवाएं उपलब्ध कराना है। नई गाइडलाइन इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं।

 उद्योग जगत ने जताई सकारात्मक प्रतिक्रिया

सम्मेलन में उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों की दवा निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने नई स्टैंडर्ड को लेकर अपने अनुभव और सुझाव भी साझा किए। उन्होंने माना कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।प्रतिनिधियों ने कहा कि नई फार्माकोपियल आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन प्रक्रियाओं को ढालने से भारतीय दवा उद्योग की विश्वसनीयता और निर्यात क्षमता दोनों में वृद्धि होगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय दवाओं की स्वीकार्यता भी और मजबूत होगी।

 डायरेक्टर आईपीसी और ड्रग कंट्रोलर ने किया संवाद

कार्यक्रम में इंडियन फार्माकोपिया कमीशन के डायरेक्टर तथा उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर ने दवा उत्पादकों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान उद्योग से जुड़े विभिन्न तकनीकी और नियामकीय प्रश्नों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नई स्टैंडर्ड का उद्देश्य उद्योग पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं बल्कि गुणवत्ता और मरीज सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे नई आवश्यकताओं को गंभीरता से अपनाएं और गुणवत्ता सुधार को अपनी प्राथमिकता बनाएं।

अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।

सम्मेलन के अंत में विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि नई फार्माकोपियल स्टैंडर्ड के प्रभावी क्रियान्वयन से भारत की दवा निर्माण क्षमता और गुणवत्ता दोनों को नई मजबूती मिलेगी।

साथ ही मरीजों को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और विश्वसनीय दवाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

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