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“Haridwar:की प्राचीन विरासत को मिलेगा डिजिटल संरक्षण, पांडुलिपियों के सर्वेक्षण-पंजीकरण और डिजिटाइजेशन के सीडीओ ने दिए सख्त निर्देश”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में ज्ञान भारत मिशन के अंतर्गत जनपद में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, सर्वेक्षण, पंजीकरण एवं डिजिटाइजेशन के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि ज्ञान भारत मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है,जिसका उद्देश्य देश की प्राचीन एवं आधुनिक ज्ञान परंपरा का संरक्षण, दस्तावेजीकरण, डिजिटाइजेशन एवं जनसुलभ बनाना है।उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जनपद में स्थित सार्वजनिक एवं निजी पुस्तकालयों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, आश्रमों, मठों, गुरुद्वारों तथा अन्य संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ज्ञान सामग्री का समयबद्ध सर्वेक्षण एवं पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तर समिति में विभिन्न विभागों के सदस्यों को नामित किया गया है, जो जनपद में उपलब्ध पांडुलिपियों के सर्वेक्षण,सत्यापन एवं संरक्षण कार्यों का समन्वय करेंगे।

मुख्य विकास अधिकारी ने जनपदवासियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी धार्मिक संस्थानों, स्वयंसेवी संस्थाओं,शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों अथवा किसी भी आमजन के पास किसी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या दुर्लभ ज्ञान सामग्री उपलब्ध है,तो वे इस राष्ट्रीय अभियान में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करते हुए ऐसी पांडुलिपियों की जानकारी जिला पर्यटन कार्यालय के सहायक पर्यटन अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) कार्यालय में कार्यरत मुख्य प्रशासनिक अधिकारी,संस्कृत अकादमी के डॉ. हरेश चंद्र गुरुरानी अथवा संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय को उपलब्ध कराई जा सकती है,ताकि संबंधित पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से डिजिटाइजेशन एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल ने ज्ञान भारत मिशन के उद्देश्यों एवं कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए सार्वजनिक पुस्तकालयों, निजी पुस्तकालयों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, आश्रमों, मठों तथा अन्य संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ज्ञान सामग्री के सर्वेक्षण, संरक्षण, पंजीकरण एवं डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया से अधिकारियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पंजीकृत पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम ऐप एवं पोर्टल के माध्यम से डिजिटाइज कर संरक्षित किया जाएगा।

बैठक में जिला विकास अधिकारी के के पंत,जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अभिषेक शुक्ला,कुल सचिव उत्तराखंड संस्कृत वि.वि दिनेश कुमार, सहायक निर्देशक संस्कृत शिक्षा वाजश्रवा आर्य, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम श्याम सुंदर दास,जिला सूचना अधिकारी रती लाल शाह,प्रधानाचार्य ऋषिकुल विद्यापीठ डॉ बलदेव प्रसाद चमोली,शोध अधिकारी डॉ हरीश चंद्र गुरुरानी,ईओ शिवालिक नगर पालिका तारीख खान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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