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“सीसी सड़क में खेला बड़ा घोटाला! कागज़ों में सड़कें बनीं, लाखों डकारे… अब ग्राम प्रधान पर डीएम का बड़ा एक्शन”ग्राम प्रधान बसंती देवी पद से बर्खास्त”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार, 29 मई। जनपद हरिद्वार के विकासखंड लक्सर स्थित ग्राम पंचायत अकोढ़ा खुर्द में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सख्त कार्रवाई करते हुए ग्राम प्रधान श्रीमती बसंती देवी को पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम 2016 की धारा-138(1) के तहत की गई है।

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत में कराए गए सीसी सड़क निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल, तकनीकी मानकों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।

शिकायत मिलने के बाद सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसके आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी हरिद्वार को जांच अधिकारी नामित किया।

कश्यप बस्ती की सड़क बनी जांच की वजह

ग्राम पंचायत अकोढ़ा खुर्द की कश्यप बस्ती में कराए गए सीसी सड़क निर्माण कार्य में घटिया सामग्री लगाए जाने की शिकायत सबसे पहले सामने आई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया और कुछ ही समय में सड़क टूटने लगी।

“ग्रामीणों की शिकायतों के बाद जब मौके पर जांच हुई तो कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं।”

जांच अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत के अभिलेखों, निर्माण कार्यों, भुगतान प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन का विस्तृत परीक्षण किया गया।

जांच में पाया गया कि कई निर्माण कार्य बिना स्वीकृत मानकों के कराए गए थे। सड़क किनारे बनाई गई नालियों में तकनीकी त्रुटियां मिलीं और कई स्थानों पर निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

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एक ही सड़क का अलग-अलग दिखाकर भुगतान

जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि कुछ मामलों में एक ही सड़क को अलग-अलग कार्य दर्शाकर भुगतान लिया गया। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई।

“जांच टीम को कई ऐसे रिकॉर्ड मिले जिनमें एक ही कार्य को अलग-अलग मदों में दिखाकर भुगतान किया गया था।”

अधिकारियों के अनुसार यह गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं और वास्तविक कार्यों के बीच भी भारी अंतर पाया गया। कई कार्यों को वित्तीय वर्ष 2023-24 में दर्शाया गया, जबकि उनका भुगतान बाद में किया गया।

महत्वपूर्ण अभिलेख नहीं किए गए प्रस्तुत

जांच के दौरान ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा कई महत्वपूर्ण अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। इनमें बैंक पासबुक, कैशबुक, स्टॉक रजिस्टर, कार्य पंजिका और वित्तीय वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 के अभिलेख शामिल थे।

“अभिलेखों को समय पर प्रस्तुत न किया जाना प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।”

जांच अधिकारियों ने माना कि रिकॉर्ड के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई। इससे यह भी संदेह मजबूत हुआ कि वित्तीय लेनदेन में अनियमितताएं छिपाने का प्रयास किया गया।

निजी लाभ पहुंचाने के आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ निर्माण कार्य सार्वजनिक हित के बजाय निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए। कई सड़कें ऐसी जगह बनाई गईं जो निजी भूमि अथवा व्यक्तिगत पहुंच मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रही थीं।

“सरकारी योजनाओं का उपयोग निजी सुविधाओं के लिए किया जाना नियमों के पूरी तरह खिलाफ माना गया।”

प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना है।

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ग्राम प्रधान का स्पष्टीकरण असंतोषजनक

जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान श्रीमती बसंती देवी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि प्रशासन का कहना है कि ग्राम प्रधान द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया कि लगाए गए आरोपों का समुचित खंडन नहीं किया जा सका और प्रथम दृष्टया ग्राम प्रधान दोषी पाई गईं।

“जांच में ग्राम निधि के दुरुपयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई।”

इसी आधार पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने उन्हें ग्राम प्रधान पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए।

पंचायत विकास अधिकारी की भूमिका भी सवालों में

मामले में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शंकरदीप की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच में सामने आया कि अभिलेखों के रखरखाव और प्रस्तुतिकरण में गंभीर लापरवाही बरती गई।

इसके अलावा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी में अन्य संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।

वसूली की तैयारी

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जांच में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित धनराशि की वसूली भी कराई जाएगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

“जनपद में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” — जिलाधिकारी मयूर दीक्षित

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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पंचायतों में बढ़ी हलचल

ग्राम प्रधान के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी हलचल तेज हो गई है। प्रशासन अब पंचायतों के विकास कार्यों और वित्तीय अभिलेखों की गहन जांच की तैयारी में जुटा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तो विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और सरकारी धन का सही उपयोग संभव हो पाएगा।

इस कार्रवाई को जिला प्रशासन की बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अन्य पंचायत प्रतिनिधियों को भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि विकास योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।

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