(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। पासपोर्ट धोखाधड़ी से जुड़े करीब 15 साल पुराने मामले में आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिली है। देहरादून स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए आचार्य बालकृष्ण को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे मामले का पटाक्षेप हो गया।
सीबीआई के मुताबिक, आचार्य बालकृष्ण ने वर्ष 1998 में भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। पासपोर्ट आवेदन के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षिक प्रमाण पत्रों में दर्ज रोल नंबर को लेकर जांच एजेंसी ने आपत्ति जताई थी। इसके अलावा जांच के दौरान नगर पालिका की ओर से जारी जन्म प्रमाण पत्रों में राष्ट्रीयता से संबंधित कुछ विसंगतियां मिलने का भी सीबीआई ने दावा किया था।
मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने विभिन्न पहलुओं को खंगालते हुए 19 गवाहों के बयान दर्ज किए थे, जबकि अदालत के समक्ष 38 दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए गए थे। जांच एजेंसी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर लंबे समय तक इस मामले में कानूनी कार्रवाई चलती रही।
अब देहरादून की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आचार्य बालकृष्ण को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत के फैसले को उनके लिए बड़ी कानूनी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मामले में फैसला आने के बाद आचार्य बालकृष्ण को राहत मिली है।








































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