न्यूज़ फ्लैश
BIG BREAKING:सिडकुल में बिजली संकट पर पिटकुल का ‘मिशन रिकॉर्ड टाइम’, पीसी ध्यानी की अगुवाई में खराब ट्रांसफार्मर बदला, पिटकुल-यूपीसीएल के शानदार समन्वय से विद्युत आपूर्ति बहाल BIG BREAKING:मालागूंठी में भीषण सड़क हादसा! दो वाहनों की जोरदार भिड़ंत, कार में फंसे 4 लोगों को SDRF ने रेस्क्यू कर बचाया BIG BREAKING:नदियों का रौद्र रूप! खेतों में तेज कटाव से बढ़ी दहशत, गांवों की ओर मंडराया बाढ़ का खतरा BIG BREAKING:देहरादून में बारिश का अलर्ट! प्रशासन एक्टिव, जलभराव वाले इलाकों में QRT तैनात—डीएम आशीष चौहान ने संभाली कमान BIG BREAKING:हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ FIR से सियासी हलचल तेज, SC युवक की शिकायत पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज BIG BREAKING:इंसानियत की मिसाल: डा. कुर्बान अली कपासी की अंतिम इच्छा का हिंदू सहयोगियों ने रखा मान, ज्वालापुर कब्रिस्तान में पूरे सम्मान से कराया सुपुर्द-ए-खाक
Home » पोल » “सात गांव, 25 हजार आबादी और सिर्फ तीन दिन डॉक्टर! औरंगाबाद पीएचसी बना मरीजों के लिए परेशानी का केंद्र, स्वास्थ्य सिस्टम की खुली पोल”

“सात गांव, 25 हजार आबादी और सिर्फ तीन दिन डॉक्टर! औरंगाबाद पीएचसी बना मरीजों के लिए परेशानी का केंद्र, स्वास्थ्य सिस्टम की खुली पोल”

(शहजाद अली हरिद्वार)सिडकुल।स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारी दावों की पोल औरंगाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर खुलती नजर आ रही है। सात गांवों की लगभग 25 हजार आबादी के लिए बना यह पीएचसी डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि यहां केवल एक ही डॉक्टर तैनात है, वह भी सप्ताह में महज तीन दिन ही मरीजों को उपलब्ध हो पाते हैं।

करीब एक वर्ष पूर्व पीएचसी औरंगाबाद में डॉक्टर तरुण मिश्रा की तैनाती की गई थी और उन्हें प्रभारी चिकित्सक की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था के चलते उन्हें अपनी सेवाएं दो स्वास्थ्य केंद्रों में बांटनी पड़ रही हैं। डॉक्टर मिश्रा को सप्ताह में तीन दिन बहादराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और तीन दिन औरंगाबाद पीएचसी में बैठना होता है। ऐसे में जिन दिनों डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, उन दिनों मरीजों को निजी अस्पतालों या मेला अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सुविधा न मिलने से गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। निजी क्लीनिकों में भारी फीस चुकानी पड़ रही है और गंभीर मरीजों को दूर ले जाने में कीमती समय भी बर्बाद हो जाता है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। लोगों ने मांग की है कि पीएचसी में पूरे सप्ताह के लिए स्थायी डॉक्टर की तैनाती की जाए, ताकि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर लौट सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]

Our Visitor

5 4 6 6 7 1
Users Today : 416
Users Yesterday : 1179
[democracy id="1"]

Our Visitor

5 4 6 6 7 1
Users Today : 416
Users Yesterday : 1179