न्यूज़ फ्लैश
”काम नहीं तो वेतन नहीं’— डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह का सख्त संदेश, ग्रामीण स्वच्छता अभियान में लापरवाही पर 6 एडीओ (पंचायत) के वेतन आहरण पर रोक” “कांवड़ यात्रा में बवाल! पहले हुई तू-तू मैं-मैं, फिर चली गोली—कांवड़िए पर हमले के बाद हरिद्वार पुलिस का बड़ा एक्शन, 4 आरोपी दबोचे गए” “हरिद्वार जनसुनवाई में डीएम मयूर दीक्षित का सख्त एक्शन मोड: 65 शिकायतें, 32 का मौके पर समाधान, अधिकारियों को साफ चेतावनी—अब लापरवाही नहीं चलेगी!” “हरिद्वार में चुनावी तैयारी तेज: विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 को लेकर बीएलओ, सुपरवाइजर और बीएलए को मिला विशेष प्रशिक्षण, मतदाता सूची शुद्धिकरण से लेकर नए पंजीकरण तक दिए गए अहम दिशा-निर्देश” “सोशल मीडिया पर PM और CM के खिलाफ अभद्र टिप्पणी कर वीडियो वायरल करने वाला अतीक अहमद पुलिस के हत्थे चढ़ा, शिकायत मिलते ही सिडकुल पुलिस ने दिखाई फुर्ती, आरोपी हिरासत में” “हरिद्वार में तमंचे के दम पर लूट मचाने वाले गैंग का पर्दाफाश, लूटी गई स्कूटी पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूम रहे थे 4 शातिर, SSP नवनीत सिंह की सख्ती के आगे नहीं चली बदमाशों की चाल”
Home » मंथन » “हिमालय की ढलानों पर मंथन, आपदा से सुरक्षित विकास का महासंकल्प देहरादून में देश-विदेश के वैज्ञानिक एक मंच पर, भूस्खलन न्यूनीकरण की वैश्विक रणनीति पर पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ”

“हिमालय की ढलानों पर मंथन, आपदा से सुरक्षित विकास का महासंकल्प देहरादून में देश-विदेश के वैज्ञानिक एक मंच पर, भूस्खलन न्यूनीकरण की वैश्विक रणनीति पर पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ”

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते भूस्खलन जोखिम और सुरक्षित विकास की चुनौती को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र द्वारा हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र में आपदा-सक्षम विकास विषय पर आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम 02 फरवरी से 06 फरवरी 2026 तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं वित्तीय प्रशासन अनुसंधान संस्थान, सुद्धोवाला, देहरादून में आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, जहां भूस्खलन, भारी वर्षा और भूकंपीय गतिविधियों के कारण निरंतर खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन की प्रक्रियाओं और जोखिम को वैज्ञानिक रूप से समझने, सुरक्षित और टिकाऊ अवसंरचना विकसित करने तथा सड़कों, पुलों और जलापूर्ति जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक और लचीले इंजीनियरिंग समाधान अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विनोद कुमार सुमन ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विभागों और संस्थानों की तकनीकी क्षमता को मजबूत करना, जोखिम आकलन की प्रक्रियाओं में सुधार लाना और आपदा के बाद पुनर्बहाली तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना है।

नॉर्वे के भू-तकनीकी अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा हिमालयी परिस्थितियों के अनुरूप ढलान स्थिरता, मृदा सुदृढ़ीकरण, सॉइल नेलिंग, जल निकासी उपायों तथा उपग्रह आधारित तकनीकों के माध्यम से जोखिम मानचित्रण पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अवसर पर भूस्खलन विशेषज्ञ डॉ. हाकोन हेयर्डल ने कहा कि हिमालय जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का स्वरूप लगातार बदलता रहता है, ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव साझा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से ही हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षित विकास संभव है। बता दें कि डॉ. हकोन हेयर्डल ने दुनिया भर से 32 वर्षों की भूस्खलन विशेषज्ञता और बड़े भूस्खलन जोखिम मानचित्रण और न्यूनीकरण परियोजनाओं का नेतृत्व किया है।

विश्व बैंक के प्रतिनिधि अनुप करण्थ ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपदा तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद राज्य में आपदा पुनर्बहाली, जोखिम प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए निरंतर सहयोग किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों द्वारा हरिद्वार स्थित मनसा देवी भूस्खलन क्षेत्र का क्षेत्रीय भ्रमण किया गया, जहां वास्तविक हिमालयी परिस्थितियों के आधार पर जोखिम विश्लेषण, न्यूनीकरण उपायों और स्थानीय स्तर पर प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणालियों का व्यावहारिक अध्ययन कराया गया।

कार्यशाला में यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, यूएसडीएमए के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के प्रमुख सलाहकर डाॅ. मोहित पूनिया आदि उपस्थित रहे। कार्यशाला में नेपाल एवं भूटान के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, यूप्रिपेयर परियोजना, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग के अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है।

 

कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य

ऽ हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारणों और जोखिम को बेहतर ढंग से समझना।

ऽ रेखीय विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाना।

ऽ भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण के लिए मानकीकृत और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना।

ऽ विभिन्न संस्थानों के बीच अनुभव साझा करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना।

ऽ राज्य एवं विभागीय स्तर पर आपदा जोखिम प्रबंधन की क्षमता को मजबूत करना।

ऽ लोक निर्माण विभाग सहित रेखीय विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।

ऽ सड़कों, पुलों और जलापूर्ति प्रणालियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ डिजाइन को प्रोत्साहित करना।

ऽ ढलान स्थिरता, मृदा सुदृढ़ीकरण, सॉइल नेलिंग, जल निकासी जैसे उपायों की जानकारी देना।

ऽ उपग्रह आधारित तकनीकों और भू-स्थानिक आंकड़ों के उपयोग को बढ़ावा देना।

ऽ स्थानीय स्तर पर प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना।

 

154 Views
bahadrabadnews
Author: bahadrabadnews

क्या आप Bahadrabadnews" की खबरों से संतुष्ट हैं?

Our Visitor

4 6 0 0 1 0
Users Today : 14
Users Yesterday : 1072

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

“हरिद्वार में चुनावी तैयारी तेज: विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 को लेकर बीएलओ, सुपरवाइजर और बीएलए को मिला विशेष प्रशिक्षण, मतदाता सूची शुद्धिकरण से लेकर नए पंजीकरण तक दिए गए अहम दिशा-निर्देश”

क्या आप Bahadrabadnews" की खबरों से संतुष्ट हैं?

Our Visitor

4 6 0 0 1 0
Users Today : 14
Users Yesterday : 1072