(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से आज लोक भवन में पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने भेंट की। इस दौरान पर्यटन सचिव ने राज्यपाल को वर्ष 2026 में प्रदेश में संचालित पर्यटन गतिविधियों, चारधाम यात्रा, शीतकालीन पर्यटन तथा साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
पर्यटन सचिव ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 56 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने प्रदेश में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों तथा साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में प्रस्तावित और संचालित गतिविधियों की भी जानकारी राज्यपाल को दी।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और प्राकृतिक विविधता को देखते हुए पर्यटन को केवल धार्मिक स्थलों और यात्रा तक सीमित रखने के बजाय वर्षभर संचालित होने वाली गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने पर्वतीय जिलों में स्थानीय परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और विशिष्ट पर्यटन संभावनाओं के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने पर्यटन विभाग को साहसिक पर्यटन गतिविधियों का जिलावार वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कैलेंडर में प्रत्येक जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यटन क्षमता के अनुरूप ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, साइक्लिंग, मोटर स्पोर्ट्स सहित अन्य साहसिक गतिविधियों को शामिल किया जा सकता है। इससे देश-विदेश के पर्यटकों को पूरे वर्ष उत्तराखंड आने के लिए आकर्षित करने के साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राज्यपाल ने शीतकालीन पर्यटन को प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सर्दियों में होने वाली विशिष्ट प्राकृतिक और साहसिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाना चाहिए। हिम तेंदुआ साइटिंग, हिमालयन कार रैली और अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजनों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल प्रचार-प्रसार पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर कनेक्टिविटी, सुरक्षा, सुविधाओं, प्रशिक्षित मानव संसाधन और होमस्टे जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा।
राज्यपाल ने पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन से होने वाली आय का लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं को पर्यटन से जोड़ा जाना जरूरी है।
राज्यपाल ने पर्यटन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध, स्थानीय भागीदारी आधारित और नवाचारपरक प्रयासों को आगे बढ़ाना होगा








































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