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BIG BREAKING:: रुड़की में सजा यादों का कारवां, फिर गुलज़ार हुआ कॉलेज का आंगन… 1988-98 बैच की पूर्व छात्राओं ने मिलकर ताजा कीं सुनहरी यादें

(शहजाद अली हरिद्वार)रुड़की। श्री सनातन धर्म प्रकाश चंद कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रुड़की में आज छात्राओं एवं पूर्व छात्राओं के बीच संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान तथा महाविद्यालय से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को सांझा करने के उद्देश्य से एल्युमिनी मीट का आयोजन हर्षोल्लास, आत्मीयता और भावुक स्मृतियों के बीच संपन्न हुआ। सम्मेलन में वर्ष 1988 से 1998 के दौरान महाविद्यालय में अध्ययनरत रहीं पूर्व छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। देश के विभिन्न शहरों, विशेषकर बेंगलुरु, चंडीगढ़, पुणे आदि से आईं पूर्व छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर में पुनः कदम रखते ही अपने विद्यार्थी जीवन की पुरानी स्मृतियों को जीवंत अनुभव किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव सौरभ भूषण शर्मा ने पूर्व छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी उसके विद्यार्थी होते हैं। पूर्व छात्राएं आज देश और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही हैं, जो महाविद्यालय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि एल्युमिनी मीट जैसे कार्यक्रम पूर्व छात्राओं को अपने संस्थान से दोबारा जुड़ने और नई पीढ़ी की छात्राओं का मार्गदर्शन करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

पूर्व छात्रा प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. अर्चना चौहान ने बताया कि यह सम्मेलन विशेष रूप से वर्ष 1988 से 1998 बैच की पूर्व छात्राओं के पुनर्मिलन के उद्देश्य से आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद विभिन्न शहरों से आई छात्राओं ने महाविद्यालय के परिचित गलियारों, पुस्तकालय, प्राचार्य कक्ष और कक्षाओं को देखकर अपने विद्यार्थी जीवन की धूमिल पड़ चुकी यादों को फिर से ताज़ा किया। पुरानी सहेलियों से मिलकर छात्राओं के चेहरे पर प्रसन्नता और भावुकता स्पष्ट दिखाई दी।

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सम्मेलन की स्मृतियों को विशेष बनाने के लिए चित्रकला विभाग की ओर से उत्तराखंड की पारंपरिक हस्तनिर्मित एप्पण कला से सुसज्जित स्मृति-चिह्न पूर्व छात्राओं को भेंट किए गए। इन सुंदर स्मृति-भेंटों की संकल्पना एवं संयोजन प्रो. डॉ. अलका आर्य एवं डॉ. अर्चना चौहान के निर्देशन में किया गया।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. डॉ. अनुपमा गर्ग ने पूर्व छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि समय बीत जाता है, परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, लेकिन शिक्षण संस्थान से जुड़ी आत्मीय स्मृतियाँ कभी पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने पूर्व छात्राओं की उपस्थिति को महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि आज का यह पुनर्मिलन केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य में मजबूत संबंधों की नई शुरुआत है।

इस अवसर पर महाविद्यालय प्रवक्ता डॉक्टर कामना जैन ने अपनी भावनाओं को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देते हुए कहा

“वक़्त बदला, बदला ज़माना और बदल गए हम,

पर इस कॉलेज की मिट्टी की ख़ुशबू आज भी है वही।

चलो फिर से बैठें उसी पुरानी लाइब्रेरी की मेज़ पर,

जहाँ अधूरी रह गई थी हमारी किताबों से यारी।”

कार्यक्रम में विगत सत्रों की प्राचार्या डॉ. मधुराका सक्सेना ने कहा कि यह सम्मेलन उनके लिए अत्यंत भावुक और आनंददायक क्षण है। उन्होंने पूर्व छात्राओं को महाविद्यालय परिवार का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि उनके अनुभव, उपलब्धियाँ और संस्थान के प्रति जुड़ाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का कार्य करेंगे।

इस अवसर पर डॉ. अंजू अग्रवाल तथा चित्रकला विभाग की अध्यक्षा डॉ. स्वर्णलता मिश्रा, पूर्व पुस्तकालय अध्यक्षा सुश्री शारदा शर्मा ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और पूर्व छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।

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कार्यक्रम में उपस्थित महाविद्यालय की प्रवक्ता श्रीमती अंजलि प्रसाद, श्रीमती मुक्ता सिंघल श्रीमती अमिता असवाल, श्रीमती काजल सैनी सहित अन्य शिक्षिकाओं ने भी पूर्व छात्राओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। लंबे अंतराल के बाद महाविद्यालय परिवार से मिलकर पूर्व छात्राओं ने अपने पुराने अनुभव साझा किए और वर्तमान छात्राओं के साथ भी अपने अनुभवों का आदान-प्रदान किया।

कार्यक्रम की धन्यवाद ज्ञापन श्रृंखला में डॉ. भारती शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग ने पूर्व छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह मिलना महज़ एक समारोह नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटना है।

इस अवसर पर महाविद्यालय प्रवक्ता डॉक्टर कामना जैन ने अपनी भावनाओं को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि “वक़्त बदला, बदला ज़माना और बदल गए हम,पर इस कॉलेज की मिट्टी की ख़ुशबू आज भी है वही।

चलो फिर से बैठें उसी पुरानी लाइब्रेरी की मेज़ पर,

जहाँ अधूरी रह गई थी हमारी किताबों से यारी।”»

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