(शहजाद अली हरिद्वार) देहरादून। देहरादून के होनहार छात्र अगस्त्या सैनी ने सीबीएसई 12वीं के परीक्षा परिणामों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 98.4 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने स्कूल, बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।
दून इंटरनेशनल स्कूल, डालनवाला के कॉमर्स स्ट्रीम के छात्र अगस्त्या ने यह साबित कर दिया कि अगर मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन मिले तो खेल और पढ़ाई दोनों में एक साथ सफलता हासिल की जा सकती है।
अगस्त्या सैनी, संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO) देहरादून संदीप सैनी और श्रीमती ऋतु त्यागी के पुत्र हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, स्कूल और पूरे शहर में खुशी का माहौल है।
अगस्त्या ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। उनका कहना है कि घर के सकारात्मक माहौल और माता-पिता के लगातार प्रोत्साहन ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने की ताकत दी।
“मम्मी-पापा ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। जब भी पढ़ाई या खेल को लेकर दबाव महसूस हुआ, उन्होंने मुझे समझाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।” — अगस्त्या सैनी
अगस्त्या की खास बात यह है कि वे केवल पढ़ाई में ही अव्वल नहीं हैं, बल्कि एक बेहतरीन बास्केटबॉल खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने पिछले वर्ष पुडुचेरी में आयोजित अंडर-16 नेशनल बास्केटबॉल चैंपियनशिप में उत्तराखंड की टीम का प्रतिनिधित्व किया था।
इसके अलावा राज्य और जिला स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर अपनी खेल प्रतिभा का परिचय दिया है।
“खेल हमें अनुशासन और धैर्य सिखाते हैं, जबकि पढ़ाई भविष्य की राह बनाती है। मैंने बस दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।” — अगस्त्या सैनी
कॉमर्स जैसे कठिन विषयों में शानदार अंक लाने के पीछे अगस्त्या ने अपने शिक्षक आलोक रंजन की अहम भूमिका बताई। अगस्त्या के अनुसार, आलोक रंजन सर की पढ़ाने की अनोखी शैली और लगातार मार्गदर्शन ने एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज और इकोनॉमिक्स जैसे विषयों को आसान बना दिया।
“अगस्त्या शुरू से ही मेहनती और अनुशासित छात्र रहे हैं। उनमें सीखने की ललक और समय प्रबंधन की अद्भुत क्षमता है।” — आलोक रंजन
स्कूल प्रशासन ने भी अगस्त्या की इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। शिक्षकों का कहना है कि अगस्त्या उन छात्रों के लिए प्रेरणा हैं जो खेल और पढ़ाई को साथ लेकर चलना चाहते हैं।
आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन नहीं बना पाते, वहीं अगस्त्या सैनी ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और अनुशासन के दम पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उनकी यह सफलता न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि असली चैंपियन वही होता है जो हर मैदान में खुद को साबित करे।


























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