(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की पहल ने कुछ नन्हीं बालिकाओं के सपनों को पंख दे दिए।
सोमवार का दिन पांच सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं के लिए इतिहास बन गया, जब वे एक दिन के लिए प्रशासनिक अधिकारी बनीं और डीएम की कुर्सी पर बैठकर जनसमस्याएं सुनीं।
यह अनुभव न केवल उनके जीवन का यादगार पल बना बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत परिचय भी रहा।सुबह जैसे ही चयनित पांचों बालिकाएं—शीतल पुत्री तेलूराम (कक्षा 8,
जेनरल शाहनवाज राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ऐथल), तनीषा पुत्री शमीम (कक्षा 8, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बुक्कनपुर, लक्सर), ईशा गोयल पुत्री प्रवेश गोयल (कक्षा 11, नेशनल कन्या इंटर कॉलेज, खानपुर)
, तमन्ना पुत्री परविंदर कुमार (कक्षा 9, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अकबरपुर उर्द) और अंशिका पुत्री संदीप कुमार (कक्षा 12, अटल उत्कर्ष राजकीय इंटर कॉलेज, मुंडाखेड़ा कला)—जिला कार्यालय पहुंचीं,
पूरे ऑफिस का माहौल उत्साह और ऊर्जा से भर गया।जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बेटियों को जिला कार्यालय की कार्यप्रणाली,
जनता दरबार, और जनसुनवाई प्रणाली की जानकारी दी। इसके बाद बेटियां डीएम के साथ बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनती रहीं।
उन्होंने सरल मामलों का हल स्वयं सुझाया और जटिल मुद्दों पर जिलाधिकारी से विचार-विमर्श किया। यह देखकर कर्मचारी और जनप्रतिनिधि भी प्रभावित हुए कि किस आत्मविश्वास से ये बेटियां जिम्मेदारी निभा रही हैं।
एक दिन की प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाकर बालिकाएं बेहद उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि डीएम के साथ बैठकर लोगों की समस्याएं सुनना जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा।
वे इस अनुभव को अपने स्कूल और समुदाय के अन्य बच्चों के साथ साझा करेंगी ताकि सब बालिका शिक्षा, आत्मनिर्भरता और लैंगिक समानता के महत्व को समझें।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि यह पहल रिलैक्सो कम्पनी के सहयोग से की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों की छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, प्रशासनिक कार्यों की समझ विकसित करना और उन्हें बेहतर भविष्य की दिशा में प्रेरित करना है।
हरिद्वार प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि जब बेटियों को अवसर दिए जाएं, तो वे हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।


























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