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“ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती का बड़ा प्रहार: ज्वालापुर में नार्कोटिक दवाओं की गड़बड़ी उजागर, दो मेडिकल स्टोर बंद, लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति से मचा हड़कंप!”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। जनपद में मादक एवं मनःप्रभावी दवाओं की अवैध बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने सख्त रुख अपनाया है। “सेफ ड्रग, सेफ लाइफ अभियान” के तहत ज्वालापुर क्षेत्र में की गई संयुक्त औचक जांच में भारी अनियमितताएं पाए जाने पर दो मेडिकल फर्मों के क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगाते हुए उन्हें बंद करा दिया गया। साथ ही संबंधित फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति भी की जा रही है।यह कार्रवाई दिनांक 11 फरवरी 2026 को अपर आयुक्त, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तराखंड, देहरादून से प्राप्त निर्देशों के क्रम में की गई। उप औषधि नियंत्रक द्वारा गठित त्वरित कार्यवाही दल (QRT) के अनुपालन में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य कोडीन युक्त कफ सिरप तथा अन्य स्वापक एवं मनःप्रभावी औषधियों की अवैध बिक्री की रोकथाम सुनिश्चित करना था।जांच के दौरान ज्वालापुर स्थित वैभव मेडिकोज, सराय रोड और कुमार केमिस्ट, आर्यनगर का संयुक्त औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि संबंधित फर्में नार्कोटिक एवं मनःप्रभावी दवाओं के क्रय-विक्रय से संबंधित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने में असफल रहीं। कई मामलों में रिकॉर्ड अधूरे पाए गए, जबकि कुछ दवाओं की एंट्री निर्धारित रजिस्टर में दर्ज नहीं थी। निरीक्षण टीम ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए तत्काल प्रभाव से दोनों फर्मों के दवा क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी और प्रतिष्ठानों को बंद करा दिया।अधिकारियों के अनुसार, नार्कोटिक एवं मनःप्रभावी औषधियों का व्यापार अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में आता है, जिसके लिए सख्त नियम और अभिलेख संधारण की स्पष्ट व्यवस्था निर्धारित है। निर्धारित प्रारूप में स्टॉक रजिस्टर, खरीद बिल, बिक्री विवरण तथा चिकित्सकीय पर्चों का सुरक्षित संधारण अनिवार्य है। इन नियमों का पालन न करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।अपर आयुक्त के निर्देशों के तहत संबंधित फर्मों के औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी विक्रेता स्वापक एवं मनःप्रभावी दवाओं के क्रय-विक्रय में निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।इसी क्रम में निरीक्षण के दौरान 04 अन्य औषधि विक्रेता फर्मों को भी मौके पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इन फर्मों को निर्धारित समयावधि में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती ने बताया कि “सेफ ड्रग, सेफ लाइफ अभियान” का उद्देश्य युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से बचाना और दवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाना है। उन्होंने कहा कि कोडीन युक्त कफ सिरप और अन्य मनःप्रभावी दवाओं का दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइसेंसधारी विक्रेता नियमों का पूर्णतः पालन करें।निरीक्षण दल में औषधि निरीक्षक हरीश सिंह, औषधि निरीक्षक विनोद जगुड़ी, औषधि निरीक्षक ऋषभ धामा, औषधि निरीक्षक हार्दिक भट्ट एवं औषधि निरीक्षक मेघा भी शामिल रहे। टीम ने संयुक्त रूप से स्टॉक की भौतिक जांच, बिलों का मिलान तथा अभिलेखों की सत्यापन प्रक्रिया पूरी की।विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनहित एवं जनस्वास्थ्य सर्वोपरि है और मादक एवं मनःप्रभावी औषधियों की अवैध बिक्री किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे अभियानों को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि हरिद्वार जनपद में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

एफएसडीए की इस सख्त कार्रवाई से मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप की स्थिति है। विभाग ने सभी लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि वे अपने अभिलेख अद्यतन रखें और नियमों का अक्षरशः पालन करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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