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“राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईएमए में ली शानदार पासिंग आउट परेड की सलामी, 515 युवा अफसरों ने थामा राष्ट्र रक्षा का दायित्व, 9 महिला कैडेटों ने रचा इतिहास”

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून का ऐतिहासिक चेटवुड भवन शनिवार को उस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना, जब देश की राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर Droupadi Murmu ने पासिंग आउट परेड (पीओपी) की सलामी लेकर 515 नवप्रशिक्षित सैन्य अधिकारियों को राष्ट्रसेवा के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस भव्य समारोह में 481 भारतीय और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण कर सैन्य अधिकारी बने।भारतीय सैन्य अकादमी के 158वें नियमित तथा 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की इस भव्य परेड में राष्ट्रपति ने समीक्षा अधिकारी के रूप में भाग लिया और परेड का निरीक्षण किया। परेड के दौरान कदमताल करते कैडेटों का जोश, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का भाव देखते ही बन रहा था।

राष्ट्र सेवा का संकल्प लेकर निकले युवा अधिकारी

अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नव नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय सेना केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह देशवासियों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं की भी संरक्षक है। उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारी के रूप में अब इन युवाओं के कंधों पर देश की सुरक्षा और अखंडता की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।राष्ट्रपति ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का आधार बनाकर कार्य करें तथा हर परिस्थिति में देशहित को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाना अब इन युवा अधिकारियों का दायित्व है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

इस वर्ष की पासिंग आउट परेड का सबसे आकर्षक और ऐतिहासिक पहलू 9 महिला कैडेटों का सफलतापूर्वक पास आउट होना रहा। भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।महिला कैडेटों ने कठिन सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित किया कि भारतीय महिलाएं किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। राष्ट्रपति ने महिला कैडेटों की उपलब्धि की विशेष सराहना करते हुए कहा कि यह महिला-नेतृत्व वाले विकास और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।

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वैश्विक रक्षा सहयोग का सशक्त उदाहरण बनी परेड

आईएमए की इस पासिंग आउट परेड में 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेटों ने भी प्रशिक्षण पूरा कर सैन्य अधिकारी के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू की। यह दृश्य भारत और विभिन्न देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों तथा वैश्विक सहयोग का प्रतीक बनकर उभरा।राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व शांति, सहयोग और साझेदारी के सिद्धांतों में विश्वास रखता है। विदेशी कैडेटों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सैन्य प्रशिक्षण विश्व स्तर पर सम्मान और विश्वास का केंद्र बन चुका है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने-अपने देशों में लौटने वाले ये अधिकारी भारत के साथ मित्रता और सहयोग के मजबूत दूत बनेंगे।

बदलते सुरक्षा परिदृश्य में नई चुनौतियों का सामना करने की जरूरत

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने आधुनिक युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और आधुनिक हथियार प्रणालियों के कारण युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है।उन्होंने युवा अधिकारियों से कहा कि वे केवल पारंपरिक सैन्य कौशल तक सीमित न रहें, बल्कि नई तकनीकों और नवाचारों को भी अपनाएं। उन्होंने सेना को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार रखने के लिए निरंतर सीखने और स्वयं को विकसित करते रहने पर बल दिया।

अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करने का संदेश

राष्ट्रपति ने नव नियुक्त अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सेना में नेतृत्व का वास्तविक अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर खड़े होकर अपने सैनिकों का मार्गदर्शन करना होता है।उन्होंने अधिकारियों से उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने, अपने अधीनस्थ सैनिकों के कल्याण का ध्यान रखने तथा सैन्य प्रभावशीलता और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छा सैन्य अधिकारी वही होता है जो अपने सैनिकों का विश्वास और सम्मान अर्जित कर सके।

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गणमान्य अतिथियों की रही विशेष उपस्थिति

इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल Gurmit Singh, मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami, भारतीय सैन्य अकादमी के समादेशक Nagendra Singh सहित सेना और नागरिक प्रशासन के अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।इसके अलावा बड़ी संख्या में कैडेटों के परिजन, सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी समारोह के साक्षी बने। पासिंग आउट परेड के दौरान परिजनों के चेहरों पर गर्व और खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। वर्षों की कठिन मेहनत और प्रशिक्षण के बाद अपने बेटों और बेटियों को सैन्य अधिकारी बनते देख उनके परिवार भावुक भी नजर आए।

राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तैयार नई पीढ़ी

परेड के समापन के साथ ही 515 युवा अधिकारी भारतीय सेना और मित्र देशों की सेनाओं का हिस्सा बन गए। इन अधिकारियों ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान, अनुशासन और सैन्य कौशल के बल पर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी नव नियुक्त अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे देश की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे तथा भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

आईएमए की यह पासिंग आउट परेड न केवल सैन्य परंपराओं का भव्य प्रदर्शन रही, बल्कि महिला सशक्तिकरण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और युवा नेतृत्व के नए अध्याय की भी साक्षी बनी। राष्ट्र सेवा का संकल्प लेकर निकले इन युवा अधिकारियों पर अब देश की उम्मीदें टिकी हैं और आने वाले वर्षों में यही अधिकारी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव बनेंगे।

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