न्यूज़ फ्लैश
BIG BREAKING:सेंट्रियो मॉल में ‘हनुमान अंश’ देखकर अभिभूत हुए CM धामी, बोले—नीम करौली बाबा की भक्ति और सेवा का संदेश आज भी प्रेरणादायी BIG BREAKING : हरिद्वार में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, DM मयूर दीक्षित का बड़ा फैसला—5 सितंबर को सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र रहेंगे बंद BIG BREAKING:हरिद्वार में बारिश का कहर, सुमननगर बना ‘तालाब’ — डीएम मयूर दीक्षित ने संभाली कमान, युद्धस्तर पर चल रहा जल निकासी अभियान BIG BREAKING:किसानों के लिए धामी सरकार की नई पहल! CM धामी ने लॉन्च किया ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ एप, मौसम से मंडी तक मिलेगी हर जरूरी जानकारी BIG BREAKING:देहरादून में मौसम का बड़ा अलर्ट! 3 घंटे का ऑरेंज अलर्ट, तेज बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका—प्रशासन अलर्ट मोड पर BIG BREAKING:वन-क्लिक से धामी सरकार का बड़ा तोहफा! 9.91 लाख लाभार्थियों के खातों में पहुंची ₹147 करोड़ की सामाजिक सुरक्षा पेंशन
Home » मांग » धनपुरा में दरगाह पर अतिक्रमण का आरोप बना विवाद की जड़: ग्रामीणों ने खसरा संख्या और वक्फ पंजीकरण दिखाकर कार्रवाई पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

धनपुरा में दरगाह पर अतिक्रमण का आरोप बना विवाद की जड़: ग्रामीणों ने खसरा संख्या और वक्फ पंजीकरण दिखाकर कार्रवाई पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

(शहजाद अली हरिद्वार) हरिद्वार।(धनपुरा)हरिद्वार जनपद के बहादराबाद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पदार्था उर्फ धनपुरा में स्थित ऐतिहासिक दरगाह हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। प्रशासन द्वारा दरगाह को अतिक्रमण मानते हुए नोटिस जारी किया गया है, जिस पर ग्रामीणों ने तीखी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों ने प्रशासन के दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि दरगाह वैध भूमि पर स्थित है और यह स्थान वर्षों से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है।ग्रामीणों के अनुसार, दरगाह जिस भूमि पर स्थित है वह खसरा संख्या 231 के अंतर्गत आती है, जो कि कब्रिस्तान की जमीन है और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में UKHD3305 क्रमांक पर विधिवत रूप से पंजीकृत है।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह स्थान लंबे समय से धार्मिक उपयोग में रहा है और इसे वक्फ संपत्ति के रूप में मान्यता प्राप्त है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि दरगाह खसरा संख्या 234 में स्थित है, जो जोहड़ (तालाब) के रूप में दर्ज है और इसी आधार पर इसे अतिक्रमण बताया गया है।

इस भ्रम की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने बिना सटीक भूमि सर्वेक्षण के दरगाह को अवैध ठहराने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि यह एक गंभीर लापरवाही है, जिससे धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पूर्व में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कब्रिस्तान की चारदीवारी निर्माण के दौरान इस मजार की वैधता को स्वीकार किया गया था।ग्रामवासियों ने एसडीएम हरिद्वार को एक ज्ञापन सौंपते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष भूमि सर्वेक्षण की मांग की है। उन्होंने यह सुझाव दिया कि इस सर्वे में राजस्व विभाग, वक्फ बोर्ड, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि सही तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब यह भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत है, तो बिना वक्फ बोर्ड की अनुमति के किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई कैसे की जा सकती है?

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने बिना निष्पक्ष जांच और संवाद के जबरन कोई कदम उठाया, तो वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करेंगे और न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेंगे।

उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि वह मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को समझते हुए कानूनी प्रक्रिया का पालन करे।

यह मामला अब धार्मिक आस्था, सरकारी प्रक्रिया और भूमि विवाद के संवेदनशील त्रिकोण पर आ खड़ा हुआ है।

ऐसी स्थिति में अत्यंत सावधानी, पारदर्शिता और सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद के माध्यम से ही समाधान निकाला जा सकता है।

ALSO READ  "सपा की बैठक में गरजे नेता: मूल निवास-स्थायी निवास की विसंगतियां दूर करने और OBC आरक्षण 27% करने की उठी मांग"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]

Our Visitor

5 5 0 5 4 1
Users Today : 94
Users Yesterday : 930
[democracy id="1"]

Our Visitor

5 5 0 5 4 1
Users Today : 94
Users Yesterday : 930