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“मंगलौर में ‘आम की नगरी’ पर बेरहमी की आरी! एक के बाद एक उजड़ते बाग, तीन दर्जन पेड़ों का सफाया—प्रशासन की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल, हरियाली बचाने को जनता का फूटा गुस्सा”

(शहजाद अली हरिद्वार)मंगलौर। क्षेत्र में आम के बागों के कटान का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला अब्दुल कलाम चौक के समीप का है, जहां एक बाग में तीन दर्जन से अधिक आम के पेड़ों को काट दिए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि पिछले एक माह के भीतर आधा दर्जन से अधिक आम के बागों में सैकड़ों पेड़ों पर आरी चल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहे हैं। उद्यान विभाग की ओर से हर मामले में पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है।वहीं, वन विभाग भी इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका में दिखाई नहीं दे रहा है। चूंकि यह फलदार पेड़ों का मामला है, इसलिए प्राथमिक जिम्मेदारी उद्यान विभाग की बनती है, लेकिन विभागीय अधिकारी केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।गौरतलब है कि कभी मंगलौर को आम के बागों के हब के रूप में जाना जाता था। यहां के आम देश के विभिन्न शहरों तक सप्लाई किए जाते थे, लेकिन अब लगातार हो रहे कटान के चलते बागों की संख्या सिमटती जा रही है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि बागों का कटान ऐसे समय में किया जा रहा है जब आम के पेड़ों पर फल आने का मौसम है। नियमों के अनुसार इस अवधि में पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती, इसके बावजूद धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि बची हुई हरियाली को संरक्षित किया जा सके। वहीं इस संबंध में वन विभाग और उद्यान विभाग के अधिकारियों से वार्ता का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई।

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