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“हरिद्वार की धार्मिक मर्यादा पर “ऑनलाइन नॉनवेज डिलीवरी” का विवाद गरमाया, अखंड परशुराम अखाड़े ने डीएम को सौंपा ज्ञापन — धर्मनगरी में मांसाहारी और नशीले सामानों की होम डिलीवरी पर पूर्ण रोक लगाने की उठी मांग”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को रोशनाबाद स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र में ऑनलाइन माध्यमों से मांसाहारी खाद्य पदार्थों एवं नशीले सामानों की होम डिलीवरी पर रोक लगाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से ऑनलाइन कंपनी रैपिडो को निगम द्वारा दिए गए नोटिस की कार्रवाई को नाकाफी बताया। अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग उठाई गई।

ज्ञापन में कहा गया कि विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी हरिद्वार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा पर लगातार प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विभिन्न ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों के माध्यम से नगर क्षेत्र में मांसाहारी खाद्य पदार्थों तथा अन्य नशीले एवं प्रतिबंधित वस्तुओं की होम डिलीवरी खुले रूप से की जा रही है। इससे संत समाज और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।

अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। नगर की धार्मिक मर्यादा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में लागू म्युनिसिपल बायलॉज 1916 का पालन सख्ती से कराया जाना चाहिए।

यदि आश्रमों, घाटों और धार्मिक स्थलों तक मांसाहारी सामग्री की डिलीवरी होती रही तो इससे हरिद्वार की पवित्र छवि प्रभावित होगी। संत कार्तिक गिरी महाराज ने कहा कि हरिद्वार की पहचान सनातन संस्कृति और गंगा तीर्थ से है।

यहां धार्मिक स्थलों, आश्रमों और संत समाज के परिसरों तक मांसाहारी खाद्य पदार्थों की डिलीवरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। कथाव्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री और ऋषि शर्मा ने कहा कि हरिद्वार में नगर पालिका उपविधियां धार्मिक एवं सांस्कृतिक पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई गई थीं,

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लेकिन वर्तमान में इन नियमों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले भी संबंधित मामलों में नोटिस जारी किए गए, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संत समाज में असंतोष है।

प्रशासन को नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। इस अवसर पर स्वामी कार्तिक गिरी जी महाराज,आचार्य पवन कृष्ण शास्त्री,ऋषि शर्मा मौजूद रहे।

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