
“खेल में जीत से पहले जरूरी है संस्कार—शुद्ध व्यवहार ही बनाता है खिलाड़ी को ‘उत्तम खिलाड़ी’’
(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। खेल विद्या का हिस्सा है, जिसके प्रभाव एवं परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। समय, समर्पण, आहार, विहार एवं व्यवहार की शुद्धता एक खिलाड़ी को उत्तम खिलाडी बनाती है। दयानंद स्टेडियम प्रांगण के मेजर ध्यान चन्द सभागार मे शारीरिक शिक्षाएवं खेल विभाग के नवागन्तुक प्रशिक्षुओं के दीक्षारम्भ कार्यक्रम के अवसर पर वैदिकविद्वान,डा0 दीनदयालवेदालंकार






















