न्यूज़ फ्लैश
BIG BREAKING:: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बजने से पहले आयोग अलर्ट, दो दिवसीय हाईलेवल बैठक में चुनावी तैयारियों का महा-मंथन! BIG BREAKING:: हरिद्वार में कुट्टू के आटे पर खाद्य सुरक्षा विभाग का छापा, 2 प्रतिष्ठानों से लिए सैंपल; 13 किलो आटा मौके पर कराया नष्ट! BIG BREAKING:: धामी का अधिकारियों को दोटूक अल्टीमेटम! सड़कें गड्ढामुक्त करो, विकास कार्यों में लापरवाही की तो होगी सीधी कार्रवाई, कुंभ-2027 की हर सप्ताह होगी समीक्षा BIG BREAKING:: डोभाल पर टिप्पणी से भड़के मदन कौशिक, राहुल गांधी पर दागे तीखे सवाल! बोले— उत्तराखंड के स्वाभिमान पर चोट बर्दाश्त नहीं, कांग्रेस बताए बयान से सहमत है या नहीं? BIG BREAKING:: भैंस चुराकर नहीं बच पाया चोर! पथरी पुलिस ने 20 साल के आरोपी को दबोचा, झाबरी से चोरी की भैंस बरामद; साथियों की तलाश जारी BIG BREAKING:: हरिद्वार कुंभ-2027 की भव्य पहचान तैयार, CM धामी ने लोगो, वेबसाइट और गीत का किया लोकार्पण
Home » खेल » “हिमालय की दुर्गम चोटियों पर हौसलों की ऐतिहासिक दौड़! भारत-तिब्बत सीमा की नीति घाटी में गूंजेगा ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026’, रोमांच, साहस और राष्ट्र गौरव का बनेगा महाकुंभ”

“हिमालय की दुर्गम चोटियों पर हौसलों की ऐतिहासिक दौड़! भारत-तिब्बत सीमा की नीति घाटी में गूंजेगा ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026’, रोमांच, साहस और राष्ट्र गौरव का बनेगा महाकुंभ”

(शहजाद अली हरिद्वार)उत्तराखण्ड की दुर्गम नीति घाटी में 31 मई एवं 01 जून 2026 को आयोजित होने वाला ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ भारत में तेजी से विकसित हो रहे एडवेंचर पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना के समन्वय से आयोजित यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने, सैन्य-नागरिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा हिमालय के दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक संभावनाओं को नई पहचान देने का प्रयास है।

चमोली जनपद में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित नीति घाटी अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचाई वाले दुर्गम भूभाग और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।

हालांकि, भौगोलिक दूरस्थता और सीमित आधारभूत सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र अब तक अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन जैसे आयोजन इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा इसे सतत पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।इस अल्ट्रा रन में 75 किमी, 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी एवं 5 किमी की विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें पेशेवर खिलाड़ियों के साथ-साथ शौकिया धावक भी भाग लेंगे।

प्रतिभागियों को तीव्र चढ़ाई, कम ऑक्सीजन स्तर और बदलते मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना होगा। यही कारण है कि यह प्रतियोगिता देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति दौड़ों में से एक मानी जा रही है, जिसमें शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी आवश्यक है।

इस आयोजन की एक विशेषता नागरिक प्रशासन और भारतीय सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय है। नीति घाटी जैसे दुर्गम एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सेना की लॉजिस्टिक क्षमता, चिकित्सा सुविधाएं और संचालन विशेषज्ञता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ALSO READ  "सांसद खेल महोत्सव का आगाज़: हरिद्वार में खेल प्रतिभाओं का महासंग्राम, 700 से ज्यादा खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम, मोदी–धामी के खेल विज़न को मिलेगी नई उड़ान!"

टेंट एवं आवास व्यवस्था से लेकर चिकित्सा सहायता और मार्ग सुरक्षा सुनिश्चित करने तक, सेना की भागीदारी आयोजन को सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संपन्न कराने में अहम योगदान दे रही है।

यह पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। आयोजन के दौरान बढ़ने वाली पर्यटकों की संख्या से होम-स्टे, परिवहन, भोजन एवं गाइड सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही यह सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के व्यापक उद्देश्य को भी समर्थन प्रदान करेगा।

यह आयोजन सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में सरकार की ‘वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज’ अवधारणा के अनुरूप भी है।

प्रतिभागियों और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन इस क्षेत्र को एक जीवंत और सुलभ पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन भी इस आयोजन के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं। आयोजकों द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तथा प्रतिभागियों के बीच जागरूकता बढ़ाने जैसे उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि घाटी की प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रह सके।

आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। समन्वय बैठकें, मार्ग सर्वेक्षण, चिकित्सा योजना एवं लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रतिभागियों एवं स्थानीय समुदायों में इस आयोजन को लेकर उत्साह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]

Our Visitor

5 8 8 7 2 2
Users Today : 243
Users Yesterday : 522
[democracy id="1"]

Our Visitor

5 8 8 7 2 2
Users Today : 243
Users Yesterday : 522