(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। खेल विद्या का हिस्सा है, जिसके प्रभाव एवं परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। समय, समर्पण, आहार, विहार एवं व्यवहार की शुद्धता एक खिलाड़ी को उत्तम खिलाडी बनाती है। दयानंद स्टेडियम प्रांगण के मेजर ध्यान चन्द सभागार मे शारीरिक शिक्षाएवं खेल विभाग के नवागन्तुक प्रशिक्षुओं के दीक्षारम्भ कार्यक्रम के अवसर पर वैदिकविद्वान,डा0 दीनदयालवेदालंकार ने अपने विचार प्रस्तुत किये। भारत सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के अनुपालन मे गुरुकुल कांगड़ीसमविश्वविद्यालय, हरिद्वारद्वारा आयोजित छात्र-प्रेरणा कार्यक्रम (दीक्षारम्भ) के अवसर पर आयोजित प्रेरकव्याख्यान मे डा0 दीनदयाल वेदालंकार ने कहा कि खेल के साथ पढ़ाई विशिष्ट योग्यता प्राप्त करने की निशानी है।ऐसे शिक्षार्थी उत्तम जीवन यापन करते हुये समाज का नेतृत्व करने वाले बनते है।उन्होंने कहा कि चोरी करने वाले व्यक्ति कोपकड़ने के लिए प्राप्त की जाने वाली शिक्षा व्यक्ति को पुलिसिंग मे नेतृत्व करने केयोग्य बनाती है। उन्होंने अपने व्याख्यान मे कहा कि जब बीज भूमि मे गहराई प्राप्तकरता है,तभी वह अंकुरित होकर वृक्ष तथा फल प्रदान करने के योग्यबनता है। उन्होंने शिक्षार्थियों को समर्पण भाव से लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतरप्रयत्नशील बने रहने पर बल दिया। कार्यक्रम मे प्रभारी डा0 अजय मलिक ने स्वागत उद्बोधन प्रदान किया। डा0 शिवकुमार चौहान, डा0 कपिलमिश्रा,डा0 अनुजकुमार,डा0 प्रणवीरसिंह,सुनील कुमार, अश्वनी कुमार, दुष्यंत सिंह राणा सहित एम0पी0एड0, बी0पी0एड0 तथा बी0पी0ई0एस0 केनवस्नातक छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा0 प्रदीप कुमार द्वारा किया गया।






































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