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मुख्यमंत्री ने “एक देश-एक चुनाव” विषय पर संयुक्त संसदीय समिति के साथ किया संवाद

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “एक देश-एक चुनाव” विषय पर आयोजित संयुक्त संसदीय समिति के संवाद कार्यक्रम में भाग लिया।

इस अवसर पर उन्होंने समिति अध्यक्ष पी. पी. चौधरी और अन्य सदस्यों का स्वागत करते हुए इस विचार को लोकतंत्र को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम पहल बताया।

महत्वपूर्ण बिंदु:

1. बार-बार चुनावों से प्रशासनिक कार्य बाधित होते हैं।

2. एक साथ चुनाव से 30–35% खर्च की बचत संभव।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग समय पर चुनाव होने से बार-बार आचार संहिता लगती है, जिससे राज्य के विकास कार्य रुक जाते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न चुनावों की आचार संहिता के कारण लगभग 175 दिन तक राज्य की प्रशासनिक मशीनरी नीति निर्माण से वंचित रही।

उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव का खर्च राज्य सरकार और लोकसभा चुनाव का खर्च केंद्र सरकार उठाती है। यदि दोनों चुनाव एक साथ कराए जाएं तो व्यय भार साझा हो सकता है, जिससे राज्य और केंद्र दोनों को वित्तीय लाभ होगा।

महत्वपूर्ण बिंदु:

3. सीमित संसाधनों वाले राज्यों के लिए यह मॉडल अधिक प्रभावी।

4. खर्च की बचत का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण में किया जा सकता है

मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखण्ड की भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जून से सितंबर तक चारधाम यात्रा और वर्षा का मौसम होने से चुनाव कराना कठिन हो जाता है। इसी तरह जनवरी से मार्च के बीच वित्तीय वर्ष की समाप्ति और बोर्ड परीक्षाएं होती हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों पर दबाव बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के दूरस्थ पर्वतीय इलाकों में मतदान केंद्रों तक पहुंचने में समय और संसाधनों की अधिक आवश्यकता होती है। बार-बार चुनाव होने से मतदाता उत्साह में भी कमी आती है और मतदान प्रतिशत घटता है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

5. बार-बार चुनावों से मतदाता भागीदारी प्रभावित होती है।

6. उत्तराखण्ड जैसे राज्यों के लिए एक देश-एक चुनाव मॉडल अत्यंत उपयोगी।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि “एक देश-एक चुनाव” न केवल लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।

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