(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने गुरुवार को बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र में संचालित मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थानों की मान्यता, संचालन व्यवस्था और विद्यार्थियों के शैक्षिक हितों की स्थिति की जानकारी ली गई।
निरीक्षण के दौरान मदरसा इस्लामिया तालीमुल कुरान, भारापुर भोरी रुड़की तथा फलाहे दारैन मॉडर्न स्कूल, भोरी रुड़की के पास शिक्षा विभाग की मान्यता पाई गई, लेकिन दोनों संस्थानों के पास अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता नहीं थी।
धार्मिक शिक्षा संचालित होने के मद्देनजर प्राधिकरण अध्यक्ष ने दोनों संस्थानों को आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही बिना मान्यता धार्मिक शिक्षा संचालित नहीं करने की चेतावनी दी गई। एक सप्ताह के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई।
इसके अलावा गढ़मीरपुर और दादूपुर गोविंदपुर क्षेत्र में संचालित एवं पूर्व में संचालित रहे अन्य मदरसों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बंद हो चुके संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों एवं मदरसों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो।
निरीक्षण के दौरान एक संस्था द्वारा अपनी मान्यता स्वेच्छा से सरेंडर किए जाने की जानकारी भी सामने आई, जबकि एक अन्य संस्था ने शिक्षा विभाग से मान्यता के लिए आवेदन किया है।
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई किसी संस्था या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि बच्चों के शैक्षिक अधिकार, संस्थानों की जवाबदेही और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
उन्होंने कहा कि “नई पहचान, नया सम्मान” की भावना के साथ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।








































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