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BIG BREAKING:: पुराना ऑडियो निकला तो फाइलों में मची खलबली! सवाल पूछने वाले पर दबाव क्यों—कलियर में ‘ऑडियो बनाम फाइल’ का चटपटा खेल, जांच हुई तो खुलेगा असली राज!

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार/कलियर। पिरान कलियर स्थित दरगाह से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, अव्यवस्थाओं और पुराने वायरल ऑडियो को लेकर विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी हरिद्वार को भेजे गए पत्र में पत्रकार इन्तजार रजा पर दरगाह कार्यालय की छवि धूमिल करने और पुरानी ऑडियो सामग्री को प्रसारित करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। वहीं इस पूरे मामले को लेकर सवाल यह उठ रहा है कि यदि ऑडियो पुराने हैं तो उनकी सत्यता की जांच कराने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए? अब तक  ऑडियो अब तक क्यों छिपा रहा, कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जड़ें कहां तक फैली है दरगाह की संपत्तियों की हिफाजत करने में दिक्कत किसे हो रही है

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इन्तजार रजा की ओर से अब जिलाधिकारी हरिद्वार से मांग की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण को किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि दरगाह से संबंधित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं की सभी फाइलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन ऑडियो को आधार बनाकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, उनकी जांच पुलिस अथवा साइबर विशेषज्ञों से कराई जाए। ऑडियो पुराना है या नया, उसमें आवाज किसकी है, बातचीत किस संदर्भ में हुई और उसका दरगाह की व्यवस्थाओं से कोई संबंध है या नहीं—इन सभी बिंदुओं का तकनीकी परीक्षण होना चाहिए।

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दबाव नहीं, जांच होनी चाहिए

पत्रकार का काम सवाल उठाना और जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। यदि किसी खबर, ऑडियो या दस्तावेज में तथ्य गलत हैं तो संबंधित व्यक्ति या विभाग को उसका जवाब सार्वजनिक करना चाहिए। लेकिन यदि किसी पत्रकार द्वारा दरगाह की व्यवस्थाओं, कर्मचारियों, ठेकेदारों अथवा कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उसका समाधान जांच से होना चाहिए, दबाव या आरोप-प्रत्यारोप से नहीं।

कलियर दरगाह से जुड़े जिन मामलों की परतें सामने आ रही हैं, उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका आग्रह है कि किसी कर्मचारी, ठेकेदार या अन्य को केवल आरोपों के आधार पर दोषी न माना जाए, बल्कि दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड, नियुक्ति संबंधी अभिलेख, ठेकों की प्रक्रिया और वायरल ऑडियो की तकनीकी जांच के आधार पर वास्तविकता सामने लाई जाए।

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निलंबन या ब्लैकलिस्टिंग भी जांच के निष्कर्ष से जुड़ी हो कड़ी

मामले में यह भी मांग उठ रही है कि यदि किसी कर्मचारी या ठेकेदार के खिलाफ पहले से विभागीय कार्रवाई, निलंबन या ब्लैकलिस्टिंग की गई है, तो उसकी भी निष्पक्ष समीक्षा हो। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई बरकरार रखते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए

दबाव या दरगाह की फाइलों की जांच? असली सवाल यही

कलियर दरगाह से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से अलग-अलग सवाल उठते रहे हैं। ठेके, कर्मचारियों की भूमिका, कथित अनियमितताएं, दरगाह की संपत्तियों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

ऐसे में यदि किसी पत्रकार द्वारा दस्तावेज, ऑडियो या शिकायतों के आधार पर सवाल उठाए जाते हैं तो उसे दबाव में लेने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जानी चाहिए। पत्रकार गलत है तो जांच में सामने आ जाएगा और आरोपों में दम है तो कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।

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डीएम हरिद्वार से सीधी मांग है—पत्रकार को निशाना बनाने के बजाय दरगाह की फाइलें खोलिए, पुराने और नए सभी ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराइए और जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई कीजिए।

क्योंकि सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि दरगाह की व्यवस्था, पारदर्शिता और जनविश्वास का है। निष्पक्ष जांच ही यह तय करेगी कि वायरल ऑडियो महज आरोप हैं या उनके पीछे कोई वास्तविक कहानी भी छिपी है।

सवाल है कि कलियर दरगाह की व्यवस्था कितनी पारदर्शी है, उसकी संपत्तियां कितनी सुरक्षित हैं और ठेकों व वित्तीय मामलों में नियमों का कितना पालन हुआ है।

फाइलें खुलेंगी, ऑडियो की जांच होगी और दस्तावेज सामने आएंगे तो सच अपने आप सामने आ जाएगा। अब जरूरत आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच की है।

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सवाल है कि कलियर दरगाह की व्यवस्था कितनी पारदर्शी है, उसकी संपत्तियां कितनी सुरक्षित हैं और ठेकों व वित्तीय मामलों में नियमों का कितना पालन हुआ है। फाइलें खुलेंगी, ऑडियो की जांच होगी और दस्तावेज सामने आएंगे तो सच अपने आप सामने आ जाएगा। अब जरूरत आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच की है।

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