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“हरिद्वार में खाने के नाम पर नया विवाद, संत समाज बोला— ‘वेज बिरयानी’ नहीं ‘वेज पुलाव’ लिखें दुकानदार; शहरभर में लगाए जा रहे स्टिकर”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में संत समाज ने शहर में विभिन्न दुकानों, रेहड़ियों और ठेलियों पर लिखे जा रहे ‘वेज बिरयानी’ नाम का विरोध करते हुए ‘वेज पुलाव’ अभियान की शुरुआत की है।

इस अभियान के तहत संत समाज दुकानदारों के पास पहुंचकर उन्हें ‘वेज बिरयानी’ की जगह ‘वेज पुलाव’ लिखने के लिए प्रेरित कर रहा है।संतों का कहना है कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और सनातन संस्कृति की पहचान है। ऐसे में यहां खाद्य पदार्थों के नाम भी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप होने चाहिए।

अभियान के दौरान संत समाज के प्रतिनिधियों ने कई दुकानों और ठेलियों पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर लगाए।

उन्होंने दुकानदारों से सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी के व्यापार या रोजगार को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि तीर्थनगरी की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है।

“विरोध रोजगार का नहीं, नाम का”

संत समाज ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी विशेष व्यंजन से नहीं है। उनका कहना है कि शाकाहारी भोजन को ‘वेज बिरयानी’ कहने के बजाय ‘वेज पुलाव’ नाम दिया जाना अधिक उपयुक्त होगा।

संतों के अनुसार, हरिद्वार की धार्मिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के नामों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।अखंड परशुराम अखाड़े से जुड़े संतों ने कहा कि यह अभियान जनजागरण का हिस्सा है और लोगों को सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

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कांवड़ यात्रा और कुंभ-2027 से पहले सांस्कृतिक संदेश

संत समाज का कहना है कि आगामी कांवड़ यात्रा और कुंभ मेला-2027 जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों को देखते हुए हरिद्वार की पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।संतों ने स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि धर्मनगरी की विशेष पहचान और सनातन परंपराओं के सम्मान के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। अभियान को लेकर शहर में चर्चा का माहौल बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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