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“हरिद्वार में लोहड़ी की लौ से गूंजा ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश: राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले—यह पर्व नहीं, सांस्कृतिक चेतना और भाईचारे का उत्सव है”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार।उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने हरिद्वार में पंजाबी समाज द्वारा आयोजित 26वें भव्य लोहड़ी कार्यक्रम में सहभागिता कर कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। पारंपरिक उल्लास, लोकसंस्कृति की झलक और सामाजिक एकजुटता के संदेश से ओतप्रोत इस आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और आम नागरिक उपस्थित रहे। राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।अपने संबोधन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, मांगलिक आशीर्वाद और जन-सरकारों से जुड़ा हुआ उत्सव है। यह पर्व मुख्य रूप से फसल और कृषि से जुड़ा है, जो नए वर्ष के आगमन की खुशियों का प्रतीक है तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ऐसे पर्वों का विशेष महत्व है, जो मनुष्य को प्रकृति, परिश्रम और आपसी सहयोग से जोड़ते हैं।राज्यपाल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की सांस्कृतिक विविधता को “अनेकता में एकता” के रूप में परिभाषित करते हैं और लोहड़ी पर्व भी इसी भावना का सशक्त उदाहरण है। यह त्योहार न केवल पंजाब या पंजाबी समाज तक सीमित है, बल्कि देश-विदेश में मानवता, भाईचारे, समरसता और बंधुत्व का संदेश देता है। लोहड़ी जैसे पर्व समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और राष्ट्र प्रथम की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।उन्होंने पंजाबी समाज की लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि इसकी दुनिया में कोई तुलना नहीं है। पंजाबी संगीत और लोकनृत्य में ऐसी ऊर्जा और मधुरता है कि कोई भी व्यक्ति अपने आपको थिरकने से रोक नहीं पाता। यह कला न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि जीवन में उत्साह और सकारात्मक सोच का संचार भी करती है।राज्यपाल ने कोविड-19 महामारी के कठिन समय में पंजाबी समाज द्वारा किए गए मानव सेवा के अथक प्रयासों की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा के अनुरूप पंजाबी समाज हमेशा दूसरों के दुख-दर्द में सहभागी बनकर सामने आता है। चाहे लंगर सेवा हो, जरूरतमंदों की सहायता या संकट के समय समाज के लिए आगे आना—पंजाबी समाज ने हर परिस्थिति में मानवता का परिचय दिया है।अपने संबोधन में राज्यपाल ने गुरु परंपरा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की अस्थिर और संघर्षपूर्ण दुनिया में गुरु के संदेशों का अत्यधिक महत्व है। गुरु ने सभी मनुष्यों की उत्पत्ति एक ही स्रोत से बताई है, इसलिए सभी को आपसी सहिष्णुता, प्रेम और सद्भाव के साथ रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब समाज इन मूल्यों को आत्मसात करता है, तभी एक सशक्त, शांतिपूर्ण और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लोहड़ी पर्व में उपस्थित सभी लोगों से “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह अपने कार्य, व्यवहार और सोच में देशहित को सर्वोपरि रखे। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को तन-मन-धन से योगदान देना होगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और पंजाबी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण में भूमिका को सराहा। लोहड़ी उत्सव के दौरान पारंपरिक लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। आग के चारों ओर लोहड़ी की परंपरागत रस्मों के साथ लोगों ने खुशियों का इजहार किया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और आदेश चौहान, हरिद्वार की मेयर किरण जैसल एवं रुड़की की मेयर अनीता अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवी सुनील सैनी और विश्वास डाबर, पंजाबी महासभा के अध्यक्ष प्रवीन कुमार, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में जनमानस उपस्थित रहा।कार्यक्रम का समापन सौहार्द, भाईचारे और सामाजिक एकता के संदेश के साथ हुआ। लोहड़ी का यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में यादगार बना, बल्कि समाज को जोड़ने, राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को सहेजने का भी सशक्त माध्यम साबित

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