(शहजाद अली हरिद्वार) हरिद्वार, 19 अक्टूबर 2025 विकासखंड बहादराबाद के जमालपुर कला स्थित सरस केंद्र में महिलाओं ने परंपरा और नवाचार का ऐसा संगम रचा है,
जो आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखा रहा है। आईटीसी मिशन सुनहरा कल, श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम, ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से यहां के स्वयं सहायता समूह फूलों और गोबर से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण — दोनों की नई राह गढ़ रहे हैं।
मंदिरों से प्राप्त फूलों को महिलाएं अब कचरा नहीं, बल्कि संसाधन मानकर उनसे सुगंधित धूप-अगरबत्ती, पर्यावरण-मित्र दिये और पारंपरिक पूजा थालियां बना रही हैं।
मंदिरों से एकत्रित फूल ₹5 प्रति किलो (ताजे) और ₹50 प्रति किलो (सूखे) की दर पर खरीदे जाते हैं। इन्हें सुखाकर और प्रसंस्कृत कर उत्पादों में रूपांतरित किया जाता है, जिससे स्वच्छता भी बनी रहती है और आय का नया स्रोत भी तैयार होता है।
ग्रामोत्थान परियोजना तकनीकी मार्गदर्शन दे रही है, जबकि आजीविका मिशन ने प्रशिक्षण, बैंक लोन और विपणन सहयोग उपलब्ध कराया है। इस पहल से सहकारिता ने 8 से 10 लाख रुपये के वार्षिक व्यवसाय का लक्ष्य तय किया है।
सहकारिता अध्यक्ष श्रीमती विमल जोशी ने कहा — “आईटीसी मिशन सुनहरा कल की इस पहल ने महिलाओं को स्वदेशी उत्पादों से आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया है।”
जमालपुर कला का यह सरस केंद्र आज “लोकल से वोकल” की भावना के साथ स्वदेशी, स्वच्छता और सशक्तिकरण का दीप जला रहा है।

















































