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“हरिद्वार में हिंदी दिवस पर हुआ साहित्यिक ठाठ-बाट का महापर्व, जब सत्या फाउंडेशन के मंच पर गूंजे कवियों के स्वर, सम्मानित हुए समाजसेवी और महिला शक्ति, तो संवाद काव्यश्री सम्मान पाकर खिले रचनाकारों के चेहरे – हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की प्रतिज्ञा संग गूंजा पूरा प्रेस क्लब”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार में हिंदी दिवस पर सत्या फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कवियों को संवाद काव्यश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। यह आयोजन रविवार को प्रेस क्लब में हुआ, जिसका विषय था – “कब और कैसे बनेगी हिंदी, हिंद की राष्ट्रभाषा”। इस मौके पर कवियों, समाजसेवियों और महिला शक्ति को भी सम्मानित किया गया।संस्था के अध्यक्ष दीपक पंवार ने हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी की स्थापना तभी संभव है जब हम सब इसका व्यावहारिक प्रयोग बढ़ाएं। कार्यक्रम में विशेष रूप से हरिद्वार क्षेत्र के कवियों के साहित्यिक योगदान को सराहा गया और उन्हें काव्यश्री सम्मान से नवाजा गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र शास्त्री रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए हिंदी को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताया और भाषा के संवर्धन के लिए युवाओं को जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। विचार गोष्ठी में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. वाज श्रवा आर्य तथा प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।समारोह की अध्यक्षता संस्था के संरक्षक देवी सिंह राणा ने की। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को युवाओं और कवियों के लिए प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों और सम्मानित साहित्यकारों ने एक स्वर से हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में मिलकर प्रयास करने का संकल्प लिया।यह समारोह न केवल हिंदी दिवस की गरिमा को बढ़ाता है बल्कि समाज में साहित्यकारों और रचनाकारों के योगदान को सम्मानित कर नई पीढ़ी को प्रेरित भी करता है।

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