(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। आगामी कुंभ मेला-2027 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से बेहतर बनाने की दिशा में उत्तराखंड पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
पुलिस मुख्यालय, उत्तराखंड, देहरादून के निर्देशानुसार सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र (एटीसी), हरिद्वार में 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक आयोजित छह दिवसीय कुंभ मेला प्रशिक्षण के तृतीय चरण में प्रदेश के विभिन्न जनपदों एवं पुलिस इकाइयों से आए 208 प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस बल को कुंभ मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं के अनुरूप दक्ष बनाना है।
प्रदेशभर से पहुंचे 208 प्रशिक्षु
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड के सभी जनपदों और पुलिस इकाइयों से पुलिसकर्मियों ने भाग लिया। इनमें देहरादून से 14, हरिद्वार से 16, पौड़ी गढ़वाल से 12, टिहरी गढ़वाल से 10, उत्तरकाशी से 9,
रुद्रप्रयाग से 9, चमोली से 9, ऊधमसिंह नगर से 17, नैनीताल से 19, अल्मोड़ा से 11, बागेश्वर से 8, चंपावत से 9, पिथौरागढ़ से 10, 31वीं पीएसी से 11, 40वीं पीएसी से 12, 46वीं पीएसी से 12, आईआरबी प्रथम से 10 तथा आईआरबी द्वितीय से 10 प्रशिक्षु शामिल हैं।
कुंभ का इतिहास और पुलिस की भूमिका पर विशेष व्याख्यान
छह दिवसीय प्रशिक्षण के तृतीय चरण का शुभारंभ सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक प्रकाश देवली ने किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को कुंभ मेले के इतिहास, धार्मिक परंपराओं, कुंभ की संकल्पना और विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक इस मेले के महत्व से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन की दृष्टि से भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे आयोजन में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सहज वातावरण उपलब्ध कराना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
भीड़ प्रबंधन और केस स्टडी पर दिया गया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक प्रमोद घिल्डियाल ने प्रशिक्षुओं को भीड़ प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने भीड़ के प्रकार, मेले में आने वाली भीड़ की मनोवृत्ति, भीड़ नियंत्रण के वैज्ञानिक सिद्धांत, सुरक्षा रणनीति, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और पूर्व में हुए विभिन्न आयोजनों की केस स्टडी के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
उन्होंने बताया कि कुंभ मेले जैसे विशाल आयोजन में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए पुलिसकर्मियों को प्रत्येक स्थिति का पूर्व आकलन कर समन्वित और संवेदनशील तरीके से कार्य करना आवश्यक है।
हर की पैड़ी और यात्रा मार्ग का कराया गया भ्रमण
सैद्धांतिक प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रशिक्षुओं को व्यवहारिक अनुभव भी कराया गया। इसके तहत हर की पैड़ी क्षेत्र, चंडी चौक, आसपास के पार्किंग स्थलों तथा प्रमुख यात्रा मार्गों का भ्रमण कराया गया।
इस दौरान प्रशिक्षुओं को बताया गया कि किस प्रकार श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु रखा जाता है, पार्किंग व्यवस्था संचालित होती है और भीड़ बढ़ने की स्थिति में किस तरह वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जाता है।
प्रशिक्षुओं को संवेदनशील स्थलों, आपातकालीन निकासी मार्गों और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों की भी जानकारी दी गई, ताकि भविष्य में कुंभ मेले के दौरान उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
सुरक्षित और व्यवस्थित कुंभ के लिए मजबूत हो रही तैयारी
उत्तराखंड पुलिस का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी कुंभ मेला-2027 की व्यापक तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
आधुनिक पुलिसिंग, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, यातायात नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर दिए जा रहे प्रशिक्षण से पुलिस बल की कार्यक्षमता में और अधिक मजबूती आएगी।
पुलिस मुख्यालय का उद्देश्य है कि कुंभ मेले में तैनात प्रत्येक पुलिसकर्मी परिस्थितियों के अनुरूप त्वरित निर्णय लेने में सक्षम हो और देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
यही कारण है कि प्रशिक्षण के प्रत्येक चरण में व्यावहारिक अभ्यास, विशेषज्ञों के व्याख्यान और फील्ड विजिट को विशेष महत्व दिया जा रहा है।




































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