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“धराली-हर्षिल आपदा में सेवा-धर्म की मिसाल: IPS तृप्ति भट्ट के नेतृत्व में 40वीं पीएसी की टीम ने कंधों पर उठाकर बचाई सैकड़ों जिंदगियां, पत्थर हटाकर बनाया जीवनरक्षक मार्ग”

(शहजाद अली हरिद्वार)उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले का धराली एवं हर्षिल क्षेत्र बीते दिनों आई प्राकृतिक आपदा के बाद पूरी तरह संकटग्रस्त हो गया था। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और नदी-नालों के उफान ने न केवल सड़कों को तहस-नहस कर दिया, बल्कि कई गांवों और कस्बों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया। इस विकट परिस्थिति में IPS तृप्ति भट्ट के कुशल नेतृत्व में कार्यरत 40वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत टीम ने न केवल राहत कार्य को युद्धस्तर पर अंजाम दिया, बल्कि सेवा-धर्म की ऐसी अद्वितीय मिसाल पेश की, जिसे लोग बरसों तक याद रखेंगे।

आपदा की भयावह तस्वीर

धराली और हर्षिल घाटी का इलाका, जो आम दिनों में पर्यटकों के लिए स्वर्ग समान है, अचानक आपदा के मंजर में बदल गया। पहाड़ी ढलानों से गिरे विशाल पत्थर, मलबे से ढकी सड़कें, उफनती भागीरथी और बर्फीली हवाओं के बीच वहां फंसे लोग घंटों नहीं, बल्कि कई दिनों से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। स्थानीय लोग, पर्यटक, बच्चे, महिलाएं, वृद्ध — सभी के चेहरे पर डर और निराशा साफ झलक रही थी।इसी कठिन समय में 40वीं पीएसी की आपदा राहत टीम ने मोर्चा संभाला। टीम का नेतृत्व कर रहीं IPS तृप्ति भट्ट ने हालात का तुरंत जायजा लिया और पूरे ऑपरेशन को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया।

लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान

टीम के सदस्यों — सीसी विनोद गौड़, पीसी इख़लाक मलिक और पीसी धर्मवीर सिंह — ने अपने अनुभव और साहस का परिचय देते हुए राहत कार्य में कोई कसर नहीं छोड़ी।

बारिश और भूस्खलन से टूटी-फूटी सड़कों पर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जवानों को कई बार खुद कंधे पर बच्चों और बुजुर्गों को उठाकर चलना पड़ा।

कई बीमार व्यक्तियों को पीठ पर लादकर मलबे और पानी के बीच से निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए तुरंत राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया।

पत्थर हटाकर बनाया वैकल्पिक मार्ग

हालात इतने गंभीर थे कि कई जगह भारी मशीनरी भी समय पर नहीं पहुंच सकी। ऐसे में टीम के जवानों ने अपने हाथों से बड़े-बड़े पत्थर हटाकर रास्ता बनाया, ताकि एंबुलेंस और राहत वाहन आगे बढ़ सकें। यह सिर्फ राहत कार्य नहीं था, बल्कि ज़िंदगी और मौत के बीच बिछाई गई एक जीवनरेखा थी।IPS तृप्ति भट्ट खुद मोर्चे पर मौजूद रहीं। उन्होंने न केवल निर्देश दिए, बल्कि कई बार खुद भी राहत कार्य में हाथ बंटाया। स्थानीय लोग बताते हैं कि अधिकारी और जवानों ने दिन-रात का फर्क भुलाकर, सिर्फ एक लक्ष्य रखा — “हर फंसे हुए व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना।”

कांवड़ सेवा से लेकर आपदा राहत तक

इस राहत टीम का जज्बा इससे पहले भी कांवड़ यात्रा के दौरान देखने को मिला था, जब 300 से अधिक शिवभक्तों को डूबने से बचाया गया था।

वही जज्बा अब धराली और हर्षिल की आपदा में भी दिखाई दिया। इस बार चुनौती कई गुना कठिन थी, लेकिन टीम ने हर परिस्थिति का सामना डटकर किया।टीम के एक सदस्य ने कहा — “जब हमने लोगों की आंखों में उम्मीद देखी, तो थकान का नाम ही नहीं रहा। हमें पता था कि हर मिनट, हर कदम, किसी की जिंदगी बचा सकता है।”

मानवता की मिसाल

आपदा राहत का काम सिर्फ बचाव तक सीमित नहीं था। टीम ने फंसे हुए लोगों को भोजन, पानी और आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध कराईं। ठंड से बचाने के लिए कंबल और कपड़ों का इंतजाम किया गया। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटते ही जवानों के चेहरे भी खिल उठते थे।यह सिर्फ एक प्रशासनिक अभियान नहीं था, बल्कि मानवता के मूल्यों का ज्वलंत उदाहरण था। सेवा-धर्म की वह भावना, जिसे भारतीय संस्कृति में सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है, इस अभियान में साफ दिखाई दी।स्थानीय प्रशासन और जनता की प्रतिक्रिया

स्थानीय प्रशासन ने 40वीं पीएसी टीम के योगदान को सराहते हुए कहा कि अगर उनकी त्वरित कार्रवाई न होती, तो कई जिंदगियां खतरे में पड़ सकती थीं। वहीं, जिन लोगों को सुरक्षित निकाला गया, उनकी आंखों में कृतज्ञता के आंसू थे।गांव की एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होकर कहा — “ये सिर्फ पुलिस नहीं, हमारे अपने बेटे-बेटियां हैं, जिन्होंने हमें मौत के मुंह से खींच लिया।”

निरंतर जारी है राहत कार्य

हालांकि बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन आपदा राहत टीम अभी भी युद्धस्तर पर काम कर रही है। कुछ दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए टीम पैदल ही पहाड़ों के रास्ते तय कर रही है। पत्थर हटाना, अस्थायी पुल बनाना और जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाना — यह सिलसिला लगातार जारी है।IPS तृप्ति भट्ट ने कहा — “हमारी जिम्मेदारी तभी खत्म होगी, जब आखिरी व्यक्ति भी सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा।”

निष्कर्ष

धराली और हर्षिल की इस आपदा में 40वीं पीएसी की टीम ने जो साहस, निष्ठा और मानवता दिखाई, वह पुलिस बल के उस असली चेहरे को सामने लाती है, जो समाज के सबसे कठिन समय में ढाल बनकर खड़ा होता है। IPS तृप्ति भट्ट और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया है कि “खाकी” सिर्फ कानून का रक्षक ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जीवनदाता भी है।

 

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