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रुड़की में फर्जी दवा गिरोह का भंडाफोड़, 16,200 टैबलेट्स और 300 किलो कच्चा माल बरामद STF देहरादून, ड्रग विभाग और गंगनहर कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

(शहजाद अली हरिद्वार)रुड़की। हरिद्वार जनपद के गंगनहर कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत रामनगर में स्वास्थ्य विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की एक संयुक्त छापेमारी में फर्जी दवा निर्माण एवं सप्लाई से जुड़ा एक बड़ा गिरोह बेनकाब हुआ है। यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती, औषधि निरीक्षक अमित कुमार आज़ाद, एसटीएफ देहरादून की टीम, तथा कोतवाली गंगनहर पुलिस सम्मिलित रहे।संयुक्त टीम ने रामनगर क्षेत्र में चार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की, जहाँ से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयाँ और कच्चा माल बरामद किया गया। बरामद सामग्री में करीब 16,200 टैबलेट्स और 300 किलो से अधिक कच्चा माल शामिल है, जिनका इस्तेमाल मिथ्या छाप (फर्जी ब्रांड) दवाओं के निर्माण में किया जा रहा था।

तीन आरोपियों से पूछताछ में हुए अहम खुलासे

छापेमारी के दौरान मौके पर मौजूद तीन व्यक्तियों —

1. लोकेश गुलाटी पुत्र श्री खेमचंद, निवासी रुड़की

2. नरेश धीमान, निवासी रुड़की

3. मोहतरम अली, निवासी देवबंद, उत्तर प्रदेश —

को टीम ने तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में इन तीनों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से फर्जी दवाओं का निर्माण कर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई कर रहे हैं।

हालांकि, छापेमारी के दौरान किसी भी स्थान पर प्रत्यक्ष रूप से दवाओं का निर्माण होते नहीं पाया गया, लेकिन बरामद सामग्री और पूछताछ के आधार पर यह स्पष्ट हुआ

कि इन दवाओं का निर्माण उत्तर प्रदेश के देवबंद क्षेत्र में किया जा रहा था, और फिर उन्हें उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था।

बिना लाइसेंस के कर रहे थे कारोबार

पूरे प्रकरण की जाँच में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपियों के पास न तो दवा निर्माण का लाइसेंस था और न ही विक्रय का कोई वैध प्रमाणपत्र। यानी वे पूर्णतः अवैध रूप से फर्जी ब्रांड के नाम पर दवाओं का निर्माण और व्यापार कर रहे थे, जो आमजन के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गंभीर और घातक खतरा है।

इस पूरे गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों तक फैले होने की संभावना जताई जा रही है। ड्रग विभाग इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए अलग से खुफिया जांच करवा रहा है।

दवाओं की पुष्टि के लिए कंपनी प्रतिनिधियों को बुलाया गया

जब बरामद दवाओं की जांच की गई, तो टीम ने संबंधित ब्रांड की कंपनियों के प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाकर पुष्टि करवाई। प्रतिनिधियों ने प्राथमिक जांच के आधार पर बताया कि ये दवाएं मिथ्या छाप यानी फर्जी प्रतीत होती हैं। ऐसे मामलों में यह आवश्यक है कि दवाओं के पैकिंग, लेबलिंग, बैच नंबर और निर्माण तिथि जैसी सूचनाओं की गहनता से जांच की जाए।

ड्रग विभाग की टीम ने बरामद तीन प्रकार की दवाओं और तीन प्रकार के कच्चे माल के नमूने लेकर उन्हें राज्य प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेज दिया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत होगी सख्त कार्रवाई

वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती ने बताया कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद यदि दवाएं मिथ्या प्रमाणित होती हैं तो आरोपियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना और लंबी अवधि की जेल की सजा का प्रावधान है।

टीमों का संयोजन और तत्परता

इस पूरी कार्रवाई में तीन मुख्य टीमें सक्रिय रहीं:

ड्रग विभाग टीम:

अनीता भारती, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक, हरिद्वार

अमित कुमार आज़ाद, औषधि निरीक्षक, रुद्रप्रयाग

एसटीएफ देहरादून टीम:

सब-इंस्पेक्टर नैरोत्तम बिष्ट व सहयोगी टीम

गंगनहर कोतवाली पुलिस टीम:

सब-इंस्पेक्टर मनीष कवि व सहयोगी अधिकारीगण

इनकी तत्परता और सटीक समन्वय से ही यह सफलता संभव हो सकी।

समापन टिप्पणी

यह छापेमारी ना केवल कानून व्यवस्था की दृष्टि से, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनधिकृत दुकानों और अनजाने ब्रांड की दवाएं खरीदने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।

 

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