(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराध और अवैध दूरसंचार गतिविधियों के खिलाफ एसटीएफ की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में एसटीएफ उत्तराखंड और देहरादून पुलिस की संयुक्त टीम ने देहरादून में अवैध सिम बॉक्स के जरिए संचालित किए जा रहे एक संदिग्ध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कंपनी के मैनेजर और रीजनल मैनेजर को गिरफ्तार किया है। मौके से 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स, 45 सिम कार्ड, लैपटॉप, राउटर, एटीएम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार दूरसंचार विभाग से मिले इनपुट के आधार पर देहरादून क्षेत्र में संदिग्ध सिम बॉक्स के संचालन की जानकारी सामने आई थी। इस सेटअप से जुड़े कुछ मोबाइल नंबरों के खिलाफ चक्षु पोर्टल और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शिकायतें भी दर्ज पाई गई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक साइबर शान्तनु परासर के निर्देशन में टीम गठित की गई।
तकनीकी जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद एसटीएफ की टीम ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर जीएमएस रोड स्थित कमला पैलेस के पास कैरियर हाउस बिल्डिंग में संचालित SINGH ASSET RECON SERVICES PRIVATE LIMITED (SARS) के कार्यालय में छापेमारी की। जांच के दौरान कार्यालय में संदिग्ध तरीके से कॉल सेंटर संचालित होता मिला।
32 स्लॉट वाले सिम बॉक्स से हो रही थी कॉलिंग
तलाशी के दौरान कंपनी के कार्यालय में DINSTAR कंपनी का 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स बरामद हुआ। दूरसंचार विभाग की अधिकारी ने सिम बॉक्स की पुष्टि करते हुए बताया कि इस प्रकार के उपकरण के जरिए कॉल की वास्तविक पहचान छिपाई जा सकती है और इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी अथवा अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। पुलिस के मुताबिक इस तरह का इस्तेमाल दूरसंचार विभाग की निर्धारित गाइडलाइन का उल्लंघन है।
पुलिस ने मौके से कुल 45 सिम कार्ड, एक DELL कंपनी का लैपटॉप, दो XSTREAM FIBER राउटर, 4 जीबी RAM, दो एटीएम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। बरामद सिम कार्डों में BSNL, Jio और VI के सिम शामिल बताए गए हैं।
लैपटॉप में कई बैंकों के ग्राहकों का डेटा
एसटीएफ के मुताबिक बरामद लैपटॉप की जांच में SBI, BOB, AXIS BANK, POONAWALLA FINANCE, YES BANK और RBL समेत कई बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड से संबंधित डेटा मिला है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण डेटा भी बरामद हुआ है। पुलिस का कहना है कि डेटा के स्रोत और उसके इस्तेमाल से संबंधित पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है।
जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर से लोगों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने और उससे जुड़े लाभ बताने के नाम पर फोन किए जाते थे। आरोप है कि कई मामलों में ग्राहकों पर जल्द धनराशि जमा कराने के लिए दबाव बनाया जाता था। कुछ ग्राहकों को धमकी भरे कॉल और गाली-गलौच के जरिए डराने का भी आरोप है। पुलिस के अनुसार, इसी दबाव के चलते कुछ लोगों से उनकी संवेदनशील जानकारी और धनराशि हासिल करने का प्रयास किया जाता था।
करीब 39 युवक-युवतियां करते थे काम
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कॉल सेंटर में करीब 39 अन्य युवक-युवतियों को काम पर रखा गया था। इन्हें कमीशन के आधार पर भुगतान किए जाने की बात पूछताछ में सामने आई है। कॉलिंग के लिए कर्मचारियों को ग्राहकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कॉल सेंटर के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया और कितने लोग कथित धोखाधड़ी से प्रभावित हुए।
1600 नंबर सीरीज के बजाय निजी मोबाइल नंबरों से कॉल
जांच में दूरसंचार नियमों से जुड़े उल्लंघन का मामला भी सामने आया। पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर द्वारा TRAI की निर्धारित व्यवस्था के तहत कस्टमर हेल्पलाइन की 1600 नंबर सीरीज का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। इसके बजाय व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से ग्राहकों को कॉल की जा रही थी। पुलिस का आरोप है कि इन्हीं कॉल के दौरान ग्राहकों पर दबाव बनाया जाता था।
मामले में पुलिस ने कंपनी के मैनेजर लक्ष्मण प्रसाद और रीजनल मैनेजर जगमोहन सिंह रावत को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विवेचना की जा रही है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
अभियुक्तों के खिलाफ मु0अ0सं0 49/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(1), 61(2), 3(5), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C), 66(D) तथा दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(1), 42(3) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
एसटीएफ ने बताया कि मामले की जांच जारी है और बरामद डिजिटल उपकरणों तथा डेटा की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद ग्राहक डेटा कहां से प्राप्त किया गया और इसका इस्तेमाल किन-किन गतिविधियों में किया गया।
एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि बैंक अथवा वित्तीय संस्थान के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल से सावधान रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, OTP या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।चाहें तो इसी खबर का चटपटा बड़ा टाइटल और न्यू-स्टाइल HD बैनर टेक्स्ट भी तैयार कर सकता हूँ।








































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