(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार, 11 जून 2026।जनपद हरिद्वार में यातायात व्यवस्था को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर परिवहन विभाग ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 से अधिक बिना सत्यापन संचालित ई-रिक्शाओं को सीज कर दिया।
यह कार्रवाई सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) निखिल शर्मा और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नेहा झा के नेतृत्व में चलाए गए विशेष प्रवर्तन अभियान के दौरान की गई।
परिवहन विभाग द्वारा वाल्मीकि चौक, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, कर्नाटक भवन और आसपास के व्यस्त इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया गया।
जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे ई-रिक्शा पाए गए जो बिना निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी किए सड़कों पर यात्रियों को ढो रहे थे। विभाग ने ऐसे वाहनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सीज कर दिया।
यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं
अधिकारियों का कहना है कि बिना सत्यापन संचालित ई-रिक्शा यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। कई मामलों में वाहन चालक और वाहन की पूरी जानकारी प्रशासनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होती, जिससे किसी दुर्घटना अथवा आपराधिक घटना की स्थिति में जांच प्रभावित हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्थिति में अवैध या बिना सत्यापन वाहनों को संचालन की अनुमति न दी जाए।
चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ी जिम्मेदारी
इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और हरिद्वार देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का प्रमुख प्रवेश द्वार बना हुआ है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और यात्री हरिद्वार पहुंच रहे हैं, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
ऐसे समय में ई-रिक्शा सार्वजनिक परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। लेकिन बिना सत्यापन और नियमों की अनदेखी कर संचालित होने वाले ई-रिक्शा प्रशासन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
प्रशासन का मानना है कि यदि ऐसे वाहनों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यातायात अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती है
वाल्मीकि चौक और रेलवे स्टेशन क्षेत्र रहे फोकस में
विशेष अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने सबसे पहले रेलवे स्टेशन क्षेत्र और वाल्मीकि चौक के आसपास जांच शुरू की। ये दोनों स्थान शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल हैं जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है।
जांच के दौरान अधिकारियों ने वाहन दस्तावेज, सत्यापन प्रमाणपत्र, चालक की पहचान और अन्य आवश्यक कागजातों की जांच की। बड़ी संख्या में ऐसे वाहन पाए गए जिनका सत्यापन नहीं कराया गया था। कुछ मामलों में चालकों के पास आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे।
इसके बाद विभागीय टीम ने कर्नाटक भवन और आसपास के क्षेत्रों में भी जांच अभियान चलाया जहां कई और ई-रिक्शा नियमों का उल्लंघन करते पाए गए।
कठोर कार्रवाई से मचा हड़कंप
एक साथ 50 से अधिक ई-रिक्शाओं को सीज किए जाने की कार्रवाई से वाहन चालकों और संचालकों के बीच हड़कंप की स्थिति देखने को मिली। जांच अभियान की सूचना मिलते ही कई वाहन चालक अपने वाहनों को लेकर क्षेत्र से निकलते दिखाई दिए।
हालांकि परिवहन विभाग की टीम ने कई स्थानों पर घेराबंदी कर जांच जारी रखी और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की।
अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित करना है। जो वाहन चालक और स्वामी नियमों के अनुसार कार्य कर रहे हैं उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
क्या है सत्यापन प्रक्रिया और क्यों है जरूरी?
परिवहन विभाग के अनुसार जनपद में संचालित प्रत्येक ई-रिक्शा का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन कराना अनिवार्य है। सत्यापन के दौरान वाहन स्वामी, चालक, वाहन के दस्तावेज और अन्य आवश्यक जानकारियों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।
इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चलने वाला प्रत्येक वाहन और उसका चालक प्रशासनिक निगरानी में रहे। इससे अपराध नियंत्रण, दुर्घटना जांच और यात्री सुरक्षा को मजबूत करने में सहायता मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सत्यापन प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निखिल शर्मा बोले- अभियान लगातार जारी रहेगा
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) निखिल शर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार यह अभियान पूरी गंभीरता के साथ चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिना सत्यापन संचालित ई-रिक्शाओं के खिलाफ आगे भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। वाहन स्वामियों और चालकों को पर्याप्त समय दिया जा चुका है कि वे अपने वाहनों का सत्यापन करा लें। इसके बावजूद यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी ई-रिक्शा स्वामियों से अपील की कि वे अपने दस्तावेज पूर्ण रखें और सत्यापन प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराएं।
अवैध संचालन पर विभाग की पैनी नजर
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नेहा झा ने बताया कि परिवहन विभाग जनपद में संचालित वाहनों पर लगातार निगरानी रख रहा है।
उन्होंने कहा कि विभाग को विभिन्न माध्यमों से शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं कि कुछ वाहन बिना अनुमति या बिना सत्यापन के संचालित हो रहे हैं। ऐसे मामलों में जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
नेहा झा ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी चालान, सीजिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
यातायात व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन नगर में यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए इस प्रकार के अभियान अत्यंत आवश्यक हैं।
शहर में लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या, चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के कारण यातायात प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में परिवहन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रशासन का साफ संदेश—नियमों का पालन करें
इस पूरे अभियान के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे वाहन निजी हो या व्यावसायिक, सभी को निर्धारित मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के नेतृत्व में जनपद प्रशासन यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में परिवहन विभाग को भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
हरिद्वार में बिना सत्यापन संचालित ई-रिक्शाओं के खिलाफ परिवहन विभाग की यह कार्रवाई प्रशासन की सख्त कार्यशैली को दर्शाती है। चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए यह अभियान न केवल यात्री सुरक्षा बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना सत्यापन, बिना दस्तावेज अथवा नियमों का उल्लंघन कर संचालित होने वाले वाहनों के खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। ऐसे में वाहन स्वामियों और चालकों के लिए यही बेहतर होगा कि वे समय रहते सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर नियमों के अनुसार वाहन संचालन करें।


























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