(शहजाद अली हरिद्वार)नैनीताल/हल्द्वानी: निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा को ‘व्यापार’ बनाने की कोशिशों पर अब जिला प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। शहर के नामी स्कूलों की आलीशान इमारतों के पीछे चल रहे किताबों के महंगे कारोबार पर जिलाधिकारी की नजर टेढ़ी हो गई है।
अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ
जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने 10 और निजी विद्यालयों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी जिले के 28 स्कूलों को नोटिस जारी किया जा चुका है, जिससे अब तक कुल 38 स्कूल जांच के घेरे में आ चुके हैं।
एनसीईआरटी (NCERT) को दरकिनार करना पड़ा महंगा
जांच में सामने आया है कि कई स्कूल जानबूझकर एनसीईआरटी की सस्ती और मानक किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन है।
15 दिन का अल्टीमेटम और सख्त शर्तें
प्रशासन ने स्कूलों को 15 दिन का समय देते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
एनसीईआरटी आधारित संशोधित पुस्तक सूची तुरंत जारी करें।
वेबसाइट पर फीस और किताबों का पूरा विवरण सार्वजनिक करें।
किसी विशेष विक्रेता से खरीद की बाध्यता खत्म करें।
अतिरिक्त वसूली गई फीस को वापस करें या भविष्य में समायोजित करें।
दोषी पाए जाने पर होगी बड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने विकासखंड स्तर पर जांच समितियां गठित कर दी हैं। यदि 15 दिनों के भीतर स्कूलों ने अपनी व्यवस्था नहीं सुधारी, तो उनकी मान्यता निलंबन या स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि क्या स्कूल प्रशासन इन आदेशों के आगे झुकते हैं या अभिभावकों का शोषण जारी रहता है।


























