(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड का खुलासा करते हुए आईसीआईसीआई बैंक के खाते से करीब 50 लाख रुपये की संदिग्ध निकासी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 लाख रुपये नकद, एक स्कूटी, 12 लाख रुपये की प्लॉट रजिस्ट्री, फर्जी आधार कार्ड, डेबिट कार्ड और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
जानकारी के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक की पुराना रानीपुर मोड़ शाखा के प्रबंधक अपूर्व दुबे ने अक्टूबर 2025 में कोतवाली नगर हरिद्वार में शिकायत दर्ज कराई थी कि बैंक के एक खाते से पिछले एक माह के दौरान लगभग 50 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुए हैं। खाताधारक ने बैंक की बेंगलुरु शाखा में शिकायत करते हुए बताया था कि यह निकासी उसकी जानकारी के बिना हुई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले, जिनकी लोकेशन के आधार पर भगवानपुर क्षेत्र में लगातार दबिश दी गई। आखिरकार मंडावर क्षेत्र के खेड़ी शिकोहरपुर के पास पुलिस ने एक स्कूटी के पास खड़े दो पुरुषों और एक महिला को संदिग्ध अवस्था में देखा। पुलिस को देखते ही तीनों भागने लगे, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संगीता देवी, रीनू कुमार उर्फ सोनू कुमार और उपेंद्र कुमार सहगल के रूप में हुई। तलाशी के दौरान संगीता के पास से तीन लाख रुपये नकद, दो आधार कार्ड, आकाश सिन्हा के नाम का आईसीआईसीआई बैंक डेबिट कार्ड, डेबिट कार्ड आवेदन प्रपत्र और दो मोबाइल फोन बरामद हुए। उपेंद्र के पास से चार लाख रुपये नकद और मोबाइल फोन, जबकि सोनू के पास से छह लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद किया गया। इसके अलावा एक स्कूटी और 12 लाख रुपये में खरीदे गए प्लॉट की रजिस्ट्री भी पुलिस ने कब्जे में ली।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि फर्जी आधार कार्ड के जरिए खाताधारक के नाम पर डेबिट कार्ड प्राप्त किया गया था। पहला कार्ड बंद होने पर फोन बैंकिंग के माध्यम से नया एटीएम कार्ड जारी कराया गया और उसी के जरिए नकदी निकाली गई। आरोपियों ने इस रकम से देहरादून, रुड़की और दिल्ली से करीब 35 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी। इसके अलावा एटीएम से नकदी निकालकर आपस में बांटी और ज्वेलरी बेचकर जमीन भी खरीदी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह बड़ी कंपनियों के बैंक खातों को निशाना बनाता था। बैंकिंग सिस्टम और कस्टमर केयर की प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर खातों की जानकारी बदलकर डेबिट कार्ड हासिल किए जाते थे और फिर करोड़ों रुपये वाले खातों से रकम निकालने की साजिश रची जाती थी। जांच में कई अन्य कंपनियों के खाते भी इनके निशाने पर होने की जानकारी मिली है।
पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं की बढ़ोतरी करते हुए जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी पहले भी एटीएम फ्रॉड और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




































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