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“अंकिता भंडारी ऑडियो विवाद ने फिर बढ़ाया सियासी पारा, हाईकोर्ट के आदेश के बाद आमने-सामने आए राठौर और कर्णवाल, आरोपों की जंग हुई तेज”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े कथित भ्रामक ऑडियो क्लिप मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर द्वारा प्रेस वार्ता कर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों के समाप्त होने का दावा किए जाने के बाद अब इस मामले में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

राठौर ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्होंने किसी भी नेता की छवि खराब करने का प्रयास नहीं किया और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।

प्रेस क्लब में हुआ पलटवार

सुरेश राठौर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने हरिद्वार प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में तीखा पलटवार किया। इस दौरान श्री गुरु रविदास विश्वमहापीठ भारत एवं उत्तराखंड इकाई के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

संगठन के प्रतिनिधि डॉ. धर्मेंद्र कुमार और राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने भाजपा नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम की छवि धूमिल करने का प्रयास किया है।

हाईकोर्ट के आदेश का हवाला

पत्रकार वार्ता के दौरान देशराज कर्णवाल ने नैनीताल हाईकोर्ट के हालिया आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि अदालत ने पूर्व विधायक को मिला अंतरिम संरक्षण समाप्त कर दिया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को वैधानिक कार्रवाई करने के लिए कहा है।

मुकदमे खत्म नहीं, मामलों का हुआ विलय

कर्णवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय ने संबंधित दो मामलों को खारिज नहीं किया है। उनके अनुसार, समान धाराओं और तथ्यों के आधार पर उन मामलों को अन्य प्रकरणों के साथ मर्ज किया गया है। ऐसे में मुकदमों के पूरी तरह समाप्त होने का दावा भ्रामक है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े इस ऑडियो विवाद ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर सुरेश राठौर अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा के नेता और संगठन उनसे जुड़े मामलों को गंभीर बताते हुए जांच जारी रहने की बात कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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