न्यूज़ फ्लैश
“भाई ने भाई को मारी गोली, पारिवारिक विवाद खूनी संघर्ष में बदला, आरोपी फरार” “राहुल गांधी के देहरादून कार्यक्रम से पहले बड़ा हादसा, मंच की तैयारी के दौरान कांग्रेस नेता के सिर पर गिरा लोहे का कटर, हालत गंभीर” “हरेला पर सीएम धामी का बड़ा तोहफा: जागेश्वर के विकास की खुली सौगातों की झड़ी, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से दिया हरित उत्तराखंड का संकल्प” “हरेला पर हरिद्वार से हरियाली का बड़ा संदेश: नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा व एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह ने किया वृक्षारोपण, लोगों से कहा—’एक पौधा लगाएं, भविष्य बचाएं'” “बड़ी जिम्मेदारी, बड़ा सम्मान! भाजपा के जिला सह संयोजक बने अरुण कुमार तिवारी, हरिद्वार में व्यापारियों ने पहनाईं फूलमालाएं” “हरेला पर बीएचईएल का हरियाली संकल्प: कार्यपालक निदेशक रंजन कुमार बोले— आज पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है हरेला की प्रासंगिकता”
Home » Uncategorized » जनसेवक या दबंग: हरिद्वार में सत्ता के रौब ने लांघी मर्यादा की सीमा”

जनसेवक या दबंग: हरिद्वार में सत्ता के रौब ने लांघी मर्यादा की सीमा”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार में जिला पंचायत बोर्ड की बैठक के बाद जो घटना सामने आई, वह लोकतंत्र और प्रशासनिक मर्यादाओं पर एक करारा तमाचा है। कल्याणपुर उर्फ नारसन कलां के जिला पंचायत सदस्य अरविंद राठी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे जल निगम के सहायक अभियंता नीरज को सरेआम धमकाते और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे हैं।वीडियो में नेताजी न सिर्फ “तू-तड़ाक” करते हैं, बल्कि अधिकारी को “दिमाग ठिकाने लगा देने” जैसी धमकी भी देते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वहां मौजूद किसी अधिकारी ने उन्हें टोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। सहायक अभियंता भी इसे नेताजी का “अधिकार” बताकर चुप हो गए।यह घटना न सिर्फ एक सरकारी अफसर की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि यह दर्शाती है कि सत्ता में होने का घमंड किस तरह लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल सकता है। जिस पार्टी को ‘संस्कार’ और ‘मर्यादा’ का प्रतीक बताया जाता है, उसके नेता इस तरह की भाषा और व्यवहार का प्रदर्शन कर रहे हैं, तो यह सोचने की जरूरत है कि असली संस्कार कहां हैं?

जनता सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़ी आलोचना कर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सत्ता पक्ष से जुड़ाव का मतलब है कि कोई भी अधिकारी को अपमानित कर सकता है? क्या अफसरों की चुप्पी डर का परिणाम है?

ज़रूरत है कि ऐसे मामलों में सिर्फ निंदा न हो, बल्कि सख्त कार्रवाई की जाए। नेताजी को सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगनी चाहिए और पार्टी को भी इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनसेवक होते हैं, दबंग नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]

Our Visitor

5 1 0 3 2 7
Users Today : 280
Users Yesterday : 827
[democracy id="1"]

Our Visitor

5 1 0 3 2 7
Users Today : 280
Users Yesterday : 827