(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। धर्मनगरी हरिद्वार के रहने वाले प्रियंक ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। दुनिया के शीर्ष 118 संस्थानों में शुमार, प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में 8 अगस्त 2026 को आयोजित भव्य 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में प्रियंक को पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि से नवाजा गया है। वर्तमान में एक रिसर्च एसोसिएट के पद पर कार्यरत डॉ. प्रियंक की इस शानदार उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ पूरे हरिद्वार शहर में खुशी की लहर है।
डॉ. प्रियंक की यह सफलता उनके परिवार के लंबे संघर्ष और त्याग का परिणाम है। उनके पिता सुशील हरिद्वार की सड़कों पर ऑटो रिक्शा चलाते हैं। जीवन की तमाम आर्थिक दुश्वारियों के बावजूद, उन्होंने बेटे की उच्च शिक्षा के सपने में कोई बाधा नहीं आने दी। दीक्षांत समारोह के दौरान जब डॉ. प्रियंक को मंच से डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई, तो दर्शक दीर्घा में बैठे उनके पिता सुशील और माता श्रीमती संतोष की आंखें गर्व और खुशी से नम हो गईं।
पीएचडी की इस लंबी और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण यात्रा का श्रेय डॉ. प्रियंक अपनी पत्नी प्रियंका और बेटे माधव, भाई पुलकित,अंकित व बहन कुनिका के साथ-साथ अपने सास-ससुर श्री सुनील और श्रीमती सरिता को भी देते हैं। उनके अनुसार, शोध के भारी दबाव और अनगिनत रातों की व्यस्तताओं के बीच, पत्नी प्रियंका का अटूट विश्वास, परिजनों, मित्रों और गुरुजनों द्वारा निरंतर बढ़ाया गया मनोबल और परिवार का मानसिक संबल ही इस सफलता की एक प्रमुख नींव बना। डॉ. प्रियंक ने अपना यह महत्वपूर्ण शोध कार्य आईआईटी दिल्ली के प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर अशोक एन. भास्करवार के कुशल निर्देशन में पूरा किया।
हाई-प्रेशर कोलाइडल हाइड्रोजन एफ्रॉन्स (CHAs) के निर्माण, सुरक्षित भंडारण और उसकी स्थिरता से जुड़े इस जटिल वैज्ञानिक विषय पर किए गए उनके उत्कृष्ट शोध को विशेषज्ञों द्वारा काफी सराहा गया। अपनी पीएचडी की अवधि के दौरान, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और दो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ‘बेस्ट पेपर अवार्ड’ अपने नाम किए। प्रियंक ने पहले झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय से बी.टेक. और फिर आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट कर एक सफल रिसर्च एसोसिएट बनने तक का जो सफर तय किया है, वह उन हजारों युवाओं के लिए एक जीती-जागती मिसाल है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें सच करने का हौसला रखते हैं।




































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