(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में पिछले दिनों सामने आई चार माह की मासूम बच्ची के अपहरण की घटना का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है।
इस मामले में पुलिस ने एक कथित बाबा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। बच्ची को कथित तौर पर एक दंपत्ति ने लड़का समझकर चुरा लिया था और बाद में उसे बेचने की साजिश रची जा रही थी।
एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में हरिद्वार पुलिस ने लगातार कई दिनों तक चली गहन जांच, तकनीकी विश्लेषण और विभिन्न राज्यों तक फैली पड़ताल के बाद इस चुनौतीपूर्ण मामले का सफल खुलासा किया।
बच्ची की सकुशल बरामदगी के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, वहीं आमजन भी पुलिस की सक्रिय कार्यशैली की सराहना कर रहे हैं।
गंगा स्नान के दौरान गायब हुई थी मासूम
जानकारी के अनुसार 28 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के संभल निवासी पुष्पेंद्र ने चौकी रोड़ी बेलवाला पहुंचकर सूचना दी थी कि वह अपने परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आए थे। 27 मई की रात उनका परिवार विष्णु घाट के पास हाथी पुल क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा था।
रात में पूरा परिवार गहरी नींद में था। सुबह जब परिवार की आंख खुली तो उनकी चार माह की बेटी गायब थी। पहले परिजनों ने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया और बच्ची की तलाश शुरू कर दी गई
बच्चा चोरी की घटनाओं ने बढ़ाई थी पुलिस की चुनौती
बीते कुछ समय में हरिद्वार जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बच्चों के गायब होने और चोरी की घटनाओं ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। कनखल और पिरान कलियर क्षेत्र से भी बच्चों के चोरी होने के मामले सामने आए थे।
एसएसपी नवनीत सिंह ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सभी मामलों में बच्चों की सुरक्षित बरामदगी को प्राथमिकता बनाया। कनखल और कलियर के मामलों में सफलता मिलने के बाद पुलिस ने अपना पूरा फोकस रोड़ी बेलवाला क्षेत्र से चोरी हुई चार माह की बच्ची की तलाश पर केंद्रित कर दिया।
सीसीटीवी और तकनीकी जांच से मिला पहला सुराग
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्ची के चोरी होने का सटीक समय किसी को ज्ञात नहीं था। ऐसे में पुलिस ने अनुमानित समय सीमा तय कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद ली।
जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध महिला और पुरुष दिखाई दिए। शुरुआत में यह दंपत्ति एक बच्चे के साथ विष्णु घाट क्षेत्र में घूमता नजर आया। अगले दिन वही दंपत्ति दो बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस में सवार होता दिखाई दिया।
यहीं से पुलिस को पहली महत्वपूर्ण लीड मिली।
पुलिस ने बस चालक और परिचालक से पूछताछ की। जानकारी मिली कि संदिग्ध दंपत्ति धामपुर में बस से उतरा था। इसके बाद उन्होंने ट्रेन के जरिए आगे की यात्रा की थी।
जांच टीम ने धामपुर से लेकर हावड़ा तक की पूरी यात्रा का विश्लेषण शुरू किया। रेलवे नेटवर्क में पड़ने वाले लगभग 65 स्टेशनों पर जानकारी जुटाई गई। विभिन्न रेलवे स्टेशनों, स्थानीय पुलिस इकाइयों और खुफिया तंत्र की मदद ली गई।
हालांकि शुरुआती स्तर पर कोई ठोस सफलता नहीं मिली, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी।
तलाश का एंगल बदला और खुलने लगी गुत्थी
जब रेलवे रूट से कोई महत्वपूर्ण सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने अपनी रणनीति बदली। टीम ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि संदिग्ध दंपत्ति हरिद्वार के विष्णु घाट तक आखिर पहुंचा कैसे था।
सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर पता चला कि यह दंपत्ति शिवालिक नगर क्षेत्र के ब्रह्मपुरी इलाके से विष्णु घाट की ओर आया था।
इसके बाद पुलिस ने ब्रह्मपुरी क्षेत्र में व्यापक पूछताछ शुरू की। स्थानीय लोगों को संदिग्धों के फोटो दिखाए गए। इसी दौरान एक अहम जानकारी सामने आई।
झाड़-फूंक करने वाले बाबा की झोपड़ी तक पहुंची पुलिस
स्थानीय लोगों ने बताया कि संदिग्ध महिला और पुरुष अपने बच्चे के साथ एक झाड़-फूंक करने वाले बाबा की झोपड़ी में रह रहे थे।
यह सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित झोपड़ी पर दबिश दी। पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो संदिग्ध बाबा, महिला और पुरुष मौके पर मौजूद मिले।
सबसे राहत की बात यह रही कि उनके पास मौजूद बच्ची का मिलान करने पर वह वही चार माह की मासूम निकली, जिसका हरिद्वार से अपहरण किया गया था।
बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया।
पूछताछ में सामने आया चौंकाने वाला सच
गिरफ्तार महिला और पुरुष ने पूछताछ में बताया कि वे पति-पत्नी हैं और उनके चार बच्चे हैं। इनमें तीन बेटे और एक बेटी शामिल हैं।
आरोपियों के अनुसार कुछ समय पहले महिला के चचेरे भाई ने बताया था कि एक दंपत्ति को बेटा चाहिए। उनकी पांच बेटियां हैं और वे किसी भी कीमत पर एक लड़का चाहते हैं। इसके बदले तीन लाख रुपये देने की बात कही गई थी।
हालांकि दंपत्ति ने अपना बेटा देने से इनकार कर दिया, लेकिन बड़ी रकम के लालच में उन्होंने इस बारे में अपने परिचित सत्यपाल उर्फ बाबा को जानकारी दी।
पुलिस जांच में सामने आया कि कथित बाबा सत्यपाल ने ही बच्चे चोरी करने की योजना बनाई थी। उसने दंपत्ति को सलाह दी कि हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और घाटों पर बच्चों की सुरक्षा पर अक्सर लोग ध्यान नहीं दे पाते।
योजना के तहत दंपत्ति अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर 26 मई को इटावा और लखनऊ होते हुए ट्रेन से हरिद्वार पहुंचा।
एक दिन तक वे बाबा की झोपड़ी में रुके और फिर मौका तलाशने के लिए घाटों पर घूमते रहे।
लड़का समझकर चुरा ली चार माह की बच्ची
27 और 28 मई की दरमियानी रात दंपत्ति विष्णु घाट क्षेत्र में घूम रहा था। तड़के करीब चार बजे उन्होंने एक परिवार को गहरी नींद में सोते देखा।
परिवार के बीच सो रही चार माह की मासूम को उन्होंने लड़का समझ लिया और उसे उठाकर वहां से फरार हो गए।
बाद में जब उन्हें पता चला कि बच्चा नहीं बल्कि बच्ची है तो उनकी पूरी योजना बिगड़ गई।
लखनऊ और इटावा तक लेकर गए मासूम को
बच्ची को लेकर आरोपी पहले हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे। ट्रेन न मिलने पर वे बस से धामपुर पहुंचे। वहां से ट्रेन के माध्यम से लखनऊ और फिर इटावा स्थित अपने गांव नगरिया पहुंच गए।
अपने घर पहुंचकर उन्होंने अपनी बेटी को वहीं छोड़ दिया, जबकि चोरी की गई बच्ची को साथ रखा।
इसी दौरान बाबा सत्यपाल लगातार उनके संपर्क में था और बच्ची को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की योजना बनाई जा रही थी।
बेचने की तैयारी से पहले पुलिस ने दबोचा
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बच्ची को किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने और पैसे लेने की तैयारी शुरू कर दी थी।
इसी बीच पुलिस को ब्रह्मपुरी स्थित झोपड़ी की सूचना मिल गई। जब आरोपी बच्ची को लेकर हरिद्वार पहुंचे तो पुलिस पहले से उनके इंतजार में थी।
दबिश देकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
1. सत्यपाल पुत्र विजय सिंह निवासी ग्राम सैदाबाद, कोतवाली लक्सर, हरिद्वार।
2. लाल बहादुर पुत्र कन्हैया लाल निवासी नगरिया, थाना जसवंत नगर, इटावा (उत्तर प्रदेश)।
3. प्रीती रानी पत्नी लाल बहादुर निवासी उपरोक्त।
तीनों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस टीम की मेहनत लाई रंग
इस पूरे ऑपरेशन में कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक कुंदन राणा के नेतृत्व में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं सीआईयू टीम ने तकनीकी विश्लेषण और सूचना संकलन में अहम योगदान दिया।
रोड़ी बेलवाला चौकी प्रभारी नवीन सिंह चौहान, हेड कांस्टेबल सतीश नौटियाल, कांस्टेबल निर्मल रागढ़ सहित कई पुलिसकर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर इस चुनौतीपूर्ण मामले को सुलझाया।
एसएसपी नवनीत सिंह की कार्यशैली की हो रही सराहना
लगातार सामने आ रही बच्चा चोरी की घटनाओं के बीच हरिद्वार पुलिस द्वारा कनखल, कलियर और अब रोड़ी बेलवाला मामले में बच्चों की सकुशल बरामदगी ने आम जनता का भरोसा मजबूत किया है।
चार माह की मासूम बच्ची को सुरक्षित उसके माता-पिता तक पहुंचाने के बाद हरिद्वार पुलिस की कार्यशैली की व्यापक सराहना हो रही है। खासकर एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क को इस सफलता का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संगठित और सतत प्रयासों से जटिल से जटिल अपराधों का भी खुलासा संभव है। वहीं मासूम बच्ची की सकुशल वापसी उसके परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।


























Users Today : 49
Users Yesterday : 1355
