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“सात गांव, 25 हजार आबादी और सिर्फ तीन दिन डॉक्टर! औरंगाबाद पीएचसी बना मरीजों के लिए परेशानी का केंद्र, स्वास्थ्य सिस्टम की खुली पोल”

(शहजाद अली हरिद्वार)सिडकुल।स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारी दावों की पोल औरंगाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर खुलती नजर आ रही है। सात गांवों की लगभग 25 हजार आबादी के लिए बना यह पीएचसी डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि यहां केवल एक ही डॉक्टर तैनात है, वह भी सप्ताह में महज तीन दिन ही मरीजों को उपलब्ध हो पाते हैं।

करीब एक वर्ष पूर्व पीएचसी औरंगाबाद में डॉक्टर तरुण मिश्रा की तैनाती की गई थी और उन्हें प्रभारी चिकित्सक की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था के चलते उन्हें अपनी सेवाएं दो स्वास्थ्य केंद्रों में बांटनी पड़ रही हैं। डॉक्टर मिश्रा को सप्ताह में तीन दिन बहादराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और तीन दिन औरंगाबाद पीएचसी में बैठना होता है। ऐसे में जिन दिनों डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, उन दिनों मरीजों को निजी अस्पतालों या मेला अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सुविधा न मिलने से गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। निजी क्लीनिकों में भारी फीस चुकानी पड़ रही है और गंभीर मरीजों को दूर ले जाने में कीमती समय भी बर्बाद हो जाता है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। लोगों ने मांग की है कि पीएचसी में पूरे सप्ताह के लिए स्थायी डॉक्टर की तैनाती की जाए, ताकि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर लौट सके।

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