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“दीप गंगा अपार्टमेंट में बुलडोज़र चला, मंदिर शिफ्टिंग पर बालेंद्र चौधरी भड़के – विधायक आदेश चौहान ने कहा दुर्भाग्यपूर्ण”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार।धार्मिक नगरी हरिद्वार में इन दिनों एक बुलडोज़र एक्शन ने सियासी हलचल तेज़ कर दी है। मामला है दीप गंगा अपार्टमेंट परिसर और सिडकुल क्षेत्र का, जहां मंगलवार को जिला प्रशासन और सिडकुल प्रबंधन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान ग्रीन बेल्ट और सड़क किनारे बने कई पक्के निर्माण ढहा दिए गए, वहीं परिसर में बने एक मंदिर को अन्य जगह शिफ्ट करने का आदेश भी दे दिया गया। मंदिर के स्थानांतरण का यह निर्णय जैसे ही सार्वजनिक हुआ, मामला तूल पकड़ गया। स्थानीय लोग और विपक्षी कांग्रेस इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए और इस कार्रवाई को भावनाओं से खिलवाड़ करार दिया।

प्रशासन का बुलडोज़र एक्शन

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासन, सिडकुल प्रबंधन और पुलिस की संयुक्त टीम सुबह-सुबह दीप गंगा अपार्टमेंट पहुंची। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच बुलडोज़र ग्रीन बेल्ट में बने पक्के निर्माण और अवैध ढांचों पर चलना शुरू हो गया। देखते ही देखते कई पक्की दीवारें और अस्थायी संरचनाएं मलबे में तब्दील हो गईं। प्रशासन का कहना था कि यह जमीन सरकारी है और लंबे समय से यहां अतिक्रमण फैला हुआ था। चेतावनी और नोटिस के बावजूद जब लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो मजबूरन यह कार्रवाई करनी पड़ी।सिडकुल प्रबंधन विभाग ने भी साफ किया कि औद्योगिक क्षेत्र और उससे जुड़े आवासीय परिसरों में सार्वजनिक भूमि का अवैध उपयोग किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, मंदिर को लेकर अधिकारियों ने कहा कि किसी की आस्था को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं है, बल्कि मंदिर को उचित स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि धार्मिक स्थल सुरक्षित भी रहे और ग्रीन बेल्ट की मूल योजना भी बची रहे।

मंदिर शिफ्टिंग से गरमाई राजनीति

हालांकि, मंदिर शिफ्ट करने का मुद्दा सामने आते ही सियासत गरमा गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश प्रताप राणा ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “भाजपा सरकार मंदिर तक तोड़ने पर आमादा है। बच्चों का खेल मैदान उजाड़ दिया गया है। यह सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान नहीं करती।”इसी तरह, स्थानीय कांग्रेस नेता बालेंद्र चौधरी ने भी कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन ने बिना किसी संवाद और सहमति के एकतरफा फैसला लिया है। “मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होता, यह लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा होता है। यहां रोज़ाना सैकड़ों लोग पूजा-अर्चना करते हैं, बुज़ुर्ग टहलने आते हैं और बच्चे खेलते हैं। प्रशासन ने बुलडोज़र चलाकर सब नष्ट कर दिया है।”

विधायक आदेश चौहान ने जताया अफसोस

इस पूरे विवाद पर भाजपा विधायक आदेश चौहान भी बैकफुट पर नज़र आए। उन्होंने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए कहा कि अधिकारियों से इस मामले में बातचीत की जा रही है। “जनता की भावनाओं का सम्मान हर हाल में किया जाएगा। मंदिर को हटाने से पहले लोगों को विश्वास में लिया जाना चाहिए था। मैं इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा हूं और प्रशासन से समाधान की कोशिश करूंगा।”विधायक के इस बयान से साफ है कि यह मुद्दा अब भाजपा के लिए भी असहज स्थिति बना रहा है। एक तरफ सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की ज़िम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ मंदिर जैसी संवेदनशील धार्मिक आस्था का प्रश्न भी खड़ा हो गया है।

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स्थानीय लोगों का गुस्सा

कार्रवाई के बाद दीप गंगा अपार्टमेंट परिसर के निवासी खुलकर सामने आ गए। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां रह रहे हैं और मंदिर उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। बच्चों का खेल कैंप और ग्रीन बेल्ट पर सामुदायिक गतिविधियां होती थीं। अचानक से सब उजाड़ देना किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं है।कुछ लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें न तो पर्याप्त समय दिया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था बताई। एक महिला निवासी ने कहा, “हम रोज़ सुबह पूजा करने मंदिर जाते थे। यह हमारी आस्था का केंद्र है। इसे तोड़कर या हटाकर प्रशासन हमारी भावनाओं से खेल रहा है। अगर मंदिर को हटाना ही था तो पहले लोगों से बात करनी चाहिए थी।”

प्रशासन का पक्ष

दूसरी ओर जिला प्रशासन और सिडकुल प्रबंधन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण की इजाज़त नहीं दी जा सकती। ग्रीन बेल्ट और सड़कें सार्वजनिक उपयोग के लिए होती हैं, वहां निजी निर्माण या कब्ज़े किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर को नष्ट नहीं किया जाएगा बल्कि अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा।

डीएम मयूर दीक्षित ने साफ कहा कि “सरकारी भूमि को मुक्त कराना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है। सभी अतिक्रमण चाहे छोटे हों या बड़े, हटाए जाएंगे। हां, धार्मिक स्थलों के मामले में संवेदनशीलता बरती जाएगी और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।”

आस्था बनाम विकास की जंग

यह मामला केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं है। देशभर में जब भी प्रशासनिक स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है और उसमें धार्मिक स्थल आते हैं तो विवाद खड़ा हो जाता है। आस्था और विकास की यह जंग पुरानी है।

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च जैसे स्थल समय के साथ कई बार ऐसे स्थानों पर बन जाते हैं, जो बाद में सरकारी योजनाओं का हिस्सा घोषित कर दिए जाते हैं। नतीजतन जब इन्हें हटाने या शिफ्ट करने की बात होती है तो विवाद और राजनीति तेज़ हो जाती है।

हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में तो यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि यहां हर धार्मिक स्थल सीधे तौर पर आस्था और श्रद्धा से जुड़ा होता है।

कांग्रेस बनाम भाजपा

इस मामले में कांग्रेस ने भाजपा सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा दोहरी राजनीति करती है – एक तरफ धार्मिक भावनाओं के संरक्षण का दावा करती है, दूसरी ओर मंदिरों पर बुलडोज़र चलाती है। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रही है।

दूसरी ओर भाजपा विधायक का रुख नरम पड़ना यह बताता है कि पार्टी भी इस विवाद को लेकर दबाव में है। भाजपा सरकार यह संदेश नहीं देना चाहती कि वह मंदिरों को नुकसान पहुंचा रही है, खासकर धार्मिक नगरी हरिद्वार में, जहां भावनाएं और भी संवेदनशील हैं।

आगे क्या?

अब सवाल है कि इस विवाद का समाधान कैसे होगा। प्रशासन फिलहाल सख्त रुख अपनाए हुए है

कि अतिक्रमण हर हाल में हटेगा। लेकिन विरोधी दल और स्थानीय लोग आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं। अगर मंदिर शिफ्टिंग का मुद्दा जल्द सुलझा नहीं तो यह मामला बड़ा आंदोलन और राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकता है।

संभावना है कि प्रशासन मंदिर को किसी नज़दीकी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दे और स्थानीय लोगों को विश्वास में ले। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने हितों के अनुसार भुनाने की कोशिश करेंगे।

निष्कर्ष

दीप गंगा अपार्टमेंट का बुलडोज़र एक्शन अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहा। यह आस्था बनाम प्रशासन का टकराव बन गया है।

एक तरफ सरकारी ज़मीन को कब्ज़ामुक्त कराने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ धार्मिक भावनाओं का सवाल है। कांग्रेस और स्थानीय लोग इसे बड़ा आंदोलन बनाने की तैयारी में हैं, जबकि भाजपा विधायक भी असहज स्थिति में आ चुके हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस संवेदनशील मामले को किस तरह संभालती है – क्या मंदिर को सम्मानजनक तरीके से शिफ्ट किया जाएगा या फिर यह विवाद आने वाले समय में हरिद्वार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनेगा।

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