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“मदरसों में अब बदलेगी तस्वीर! मुफ्ती समून काज़मी बोले— धामी सरकार की नई शिक्षा नीति से मुस्लिम बच्चों का भविष्य होगा रोशन”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल को लेकर पूर्व मदरसा बोर्ड अध्यक्ष मुफ्ती समून काज़मी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इससे मुस्लिम समाज के बच्चे भी मुख्यधारा की प्रतिस्पर्धाओं में आगे बढ़ सकेंगे और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

धार्मिक शिक्षा पर रोक नहीं, भ्रम फैलाया जा रहा

मुफ्ती समून काज़मी ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा धार्मिक शिक्षा पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे पर गलतफहमियां फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल मदरसों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि दीनी तालीम पहले की तरह जारी रहेगी और इसके साथ आधुनिक विषयों की शिक्षा बच्चों के भविष्य को नई दिशा देगी।

बच्चों को मिलेगा बेहतर भविष्य

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, शिक्षक और अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपना भविष्य बना सकेंगे। इससे समाज के आर्थिक और शैक्षिक स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। उनका कहना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो किसी भी समाज को तरक्की की राह पर ले जाती है।

राज्य बोर्ड से प्रमाणपत्र का मिलेगा लाभ

मुफ्ती काज़मी ने कहा कि मदरसा बोर्ड के विस्तार और राज्य बोर्ड से प्रमाणपत्र मिलने की व्यवस्था छात्रों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। इससे मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने इसे दूरगामी और सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे मदरसों की शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।

मदरसा संचालकों से की अपील

पूर्व मदरसा बोर्ड अध्यक्ष ने सभी मदरसा संचालकों से अपने संस्थानों का समय पर पंजीकरण कराने और सरकार की नई व्यवस्था का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक शिक्षा को अपनाना सभी की जिम्मेदारी है। उनका विश्वास है कि धार्मिक और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से उत्तराखंड के मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अधिक सशक्त और उज्ज्वल बनेगा।

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