(शहजाद अली हरिद्वार)कलियर। उत्तराखंड की आस्था का बड़ा केंद्र मानी जाने वाली दरगाह पिरान कलियर एक बार फिर विवादों के घेरे में है।
इस बार मामला कथित फर्जी नियुक्तियों, मौखिक आदेशों और रसूखदार लोगों की सक्रियता को लेकर गर्माया हुआ है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं
कि दरगाह से जुड़े कुछ मामलों में लिखित आदेशों की बजाय “मौखिक ऑर्डर” ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
विवाद के केंद्र में मौ. रफी की कथित सक्रियता बताई जा रही है। विरोधियों का आरोप है कि उनकी नियुक्ति को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं,
लेकिन इसके बावजूद उनकी भूमिका लगातार बनी हुई है। अब क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सक्रियता जारी है।
लोगों के बीच वायरल हो रहे कुछ कथित वीडियो और बयानों में “ऊपर से मौखिक आदेश” होने की बात कही जा रही है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दरगाह की संपत्तियों और भवनों पर कुछ प्रभावशाली लोगों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। साथ ही दो रसूखदार सुपरवाइजरों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि उनकी कार्यशैली के चलते एक समानांतर सिस्टम विकसित हो चुका है, जहां नियमों से ज्यादा प्रभाव और पहुंच काम कर रही है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक चुप्पी को लेकर उठ रहा है। लगातार विवाद और शिकायतों के बावजूद कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।
ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि यदि आरोप गलत हैं तो उनका खंडन क्यों नहीं हो रहा और यदि सही हैं तो जांच में देरी क्यों की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “ऑपरेशन कालनेमी” अभियान के बीच अब यह मामला और चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है ताकि दरगाह की पारदर्शिता और पवित्रता बनी रह सके।


























