(शहजाद अली हरिद्वार) देहरादून। दिनांक 06 मई 2026। उत्तराखण्ड में लंबे समय से फरार चल रहे इनामी अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन प्रहार” अभियान के तहत उत्तराखण्ड एसटीएफ को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
₹50,000 के इनामी आरोपी देवेन्द्र प्रकाश तिवारी को संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी उत्तराखण्ड एसटीएफ, सीबीसीआईडी देहरादून और उत्तर प्रदेश एसटीएफ के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान आगरा क्षेत्र से की गई।
मामला वर्ष 2018 का है, जब हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित धेनु एग्रो प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों से आरडी और फिक्स डिपॉजिट के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
इस संबंध में थाना कोतवाली ज्वालापुर में धारा 406, 420 और 120बी आईपीसी सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान कंपनी के संचालकों अनिल कुमार तिवारी और देवेन्द्र प्रकाश तिवारी की संलिप्तता सामने आई थी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि इस मामले में दोनों आरोपियों पर ₹50-50 हजार का इनाम घोषित किया गया था।
अनिल कुमार तिवारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि देवेन्द्र प्रकाश तिवारी पिछले लगभग सात वर्षों से फरार चल रहा था। वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था।
एसएसपी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ द्वारा विशेष रणनीति तैयार की गई थी। तकनीकी सर्विलांस, मानव स्रोतों से मिली सूचनाओं और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पिछले एक माह से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान विश्वसनीय सूचना मिली कि आरोपी आगरा के थाना डोंकी क्षेत्र में मौजूद है।
सूचना मिलते ही एसटीएफ, सीबीसीआईडी और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में घेराबंदी कर सटीक कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद उसे कोतवाली ज्वालापुर लाया गया है, जहां उसके खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी देवेन्द्र प्रकाश तिवारी (उम्र 40 वर्ष) कानपुर के हंसपुरम नौबस्ता क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में मथुरा जिले के जैत थाना क्षेत्र में रह रहा था।
एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि “ऑपरेशन प्रहार” के तहत फरार और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ लगातार सक्रिय है
और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। इस सफल ऑपरेशन में उत्तराखण्ड एसटीएफ, सीबीसीआईडी और यूपी एसटीएफ की टीमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।




































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