(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार के नारसन बॉर्डर पर उस समय हड़कंप मच गया, जब कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित एक दुकान की असली पहचान सामने आई।
‘गुप्ता चार्ट भंडार’ नाम से संचालित इस दुकान में जब श्रद्धालुओं ने QR कोड स्कैन कर भुगतान किया, तो उसमें मालिक का नाम गुलफाम दर्ज मिला।
इस खुलासे के बाद न सिर्फ ग्राहक असमंजस में पड़ गए, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुईं।
प्रशासन ने कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान को अपनी असली पहचान छुपाने की अनुमति नहीं है।
इसके बावजूद इस तरह की धोखाधड़ी सामने आना सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि धार्मिक यात्रा के दौरान इस प्रकार की गतिविधियां आस्था से सीधा खिलवाड़ हैं।
सवाल यह भी उठता है कि अगर एक दुकान फर्जी नाम से चल रही थी, तो और कितने प्रतिष्ठान इस तरह से नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं?
अब प्रशासन पर दबाव है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो,
इसके लिए निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाया जाए। मामला तूल पकड़ रहा है और कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।


























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