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“रतमऊ नदी में रेत की लूट: सुमन नगर बना खनन माफियाओं का गढ़, प्रशासन की आंखों पर पट्टी”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार जनपद के सुमन नगर क्षेत्र में रतमऊ नदी इन दिनों खनन माफियाओं के लिए सोने की खान बन गई है। अवैध खनन का यह कारोबार इतने बेख़ौफ़ अंदाज में चल रहा है कि शाम ढलते ही दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रालियां नदी में उतरती हैं और रातभर रेत-मिट्टी की लूट मचाई जाती है। इन ट्रालियों की गड़गड़ाहट रात के सन्नाटे में साफ सुनाई देती है, पर स्थानीय प्रशासन के कानों तक यह आवाज़ नहीं पहुंचती।चौंकाने वाली बात यह है कि रेत-मिट्टी की यह लूट सीधे प्रॉपर्टी डीलरों को सप्लाई की जा रही है, जो अवैध कालोनियों में इसका भराव कर रहे हैं। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि खनन माफियाओं को कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिसकर्मियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते यह काला कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है।सवाल उठता है कि जब क्षेत्र में वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की गश्त हो रही है तो फिर यह अवैध कारोबार कैसे बेरोकटोक जारी है? सूत्रों की मानें तो “एंट्री सिस्टम” के तहत जिन खनन माफियाओं की सेटिंग है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। जिनकी सेटिंग नहीं, वो कार्रवाई की जद में आ जाते हैं।

नवनियुक्त जिलाधिकारी द्वारा अवैध खनन पर शिकंजा कसने की कोशिश की जा रही है, पर उनकी टीम में ही कुछ लोग इस काम में सहयोग कर रहे हैं। वहीं सुमन नगर चौकी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यहां तैनात कुछ पुलिसकर्मियों पर खनन माफियाओं से साझेदारी के गंभीर आरोप लगे हैं। चर्चा है कि एक कारोबारी के साथ मिलकर दो ट्रैक्टर ट्रालियों में हिस्सेदारी भी की गई है।

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यह स्थिति न केवल प्रशासनिक नाकामी को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या हर स्तर पर अवैध खनन के खिलाफ ईमानदार कार्रवाई संभव है? जरूरत है कि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस मामले का संज्ञान लें और निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि सुमन नगर को इस काले कारोबार से मुक्ति दिलाई जा सके।

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