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“आईआईटी रुड़की की बड़ी वैज्ञानिक कामयाबी! सॉलिड-स्टेट बैटरियों में लिथियम आयन की रफ्तार का खुला नया राज, भविष्य की ऊर्जा तकनीक को मिलेगी नई दिशा”

(शहजाद अली हरिद्वार)रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के शोधकर्ताओं ने एक मौलिक अध्ययन प्रकाशित किया है, जो यह समझने में महत्वपूर्ण प्रगति करता है कि ठोस पदार्थों (सॉलिड मैटेरियल्स) के भीतर लिथियम आयन किस प्रकार गति करते हैं। यह क्षेत्र भविष्य की उन्नत ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

रसायन विज्ञान विभाग की प्रो. स्वस्तिका बनर्जी के नेतृत्व में किए गए इस शोध को विश्वप्रसिद्ध जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (JACS) में प्रकाशित किया गया है। “Time-Scale Renormalization of Correlation Decay Governs Li-Ion Transport in Garnet Solid Electrolytes” शीर्षक वाले इस अध्ययन में समय-पैमाना पुनःसामान्यीकरण (Time-Scale Renormalization) को आयनिक विन्यासों (Ionic Configurations) के संदर्भ में सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट्स में तीव्र लिथियम-आयन परिवहन को समझने के लिए एक नए वैज्ञानिक ढाँचे (Framework) के रूप में स्थापित किया गया है।

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों का एक संभावनाशील विकल्प माना जाता है, क्योंकि इनमें सुरक्षा, ऊर्जा घनत्व तथा परिचालन स्थिरता के संदर्भ में बेहतर प्रदर्शन की संभावना होती है। हालांकि, ठोस पदार्थों में आयनों के परिवहन को नियंत्रित करने वाले मौलिक तंत्रों को समझना अब भी एक प्रमुख वैज्ञानिक चुनौती बना हुआ है।

आईआईटी रुड़की के इस अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि लिथियम-आयन परिवहन विभिन्न समय-पैमाने पर आयनिक विन्यासों के विकास से निकटता से जुड़ा हुआ है। इस संबंध की पहचान कर शोधकर्ताओं ने उन सूक्ष्म प्रक्रियाओं (Microscopic Processes) की नई समझ प्रस्तुत की है, जो गार्नेट-आधारित सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट्स में आयनों की गतिशीलता (Ion Mobility) को प्रभावित करती हैं। गार्नेट-आधारित सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट्स भविष्य की ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण सामग्री वर्गों में से एक माने जाते हैं।

यह शोध आयन परिवहन की व्यापक वैज्ञानिक समझ को समृद्ध करता है तथा उन्नत आयन-चालक (Ion-Conducting) पदार्थों और सॉलिड-स्टेट ऊर्जा भंडारण प्रणालियों पर भविष्य के अनुसंधान के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।

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आईआईटी रुड़की के रसायन विज्ञान विभाग की प्रो. स्वस्तिका बनर्जी ने कहा, “सॉलिड-स्टेट बैटरियों के क्षेत्र में लंबे समय से एक प्रमुख चुनौती यह रही है कि ऐसे पदार्थों का डिजाइन कैसे किया जाए जो आयनों का अधिक दक्षता से परिवहन कर सकें। हमारे अध्ययन में हमने उन सूक्ष्म प्रक्रियाओं का विश्लेषण किया जो लिथियम-आयन परिवहन को नियंत्रित करती हैं, और पाया कि केवल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि लिथियम आयन कितनी दूरी तक गति करते हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपने स्थानीय सहसंबद्ध (Correlated) परिवेश की स्मृति कितनी शीघ्रता से खोते हैं। आयन गतिशीलता के एक महत्वपूर्ण सूचक (Descriptor) के रूप में समय-पैमाना पुनःसामान्यीकरण की पहचान कर हम आशा करते हैं कि यह अध्ययन शोधकर्ताओं को उन्नत सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट्स के डिजाइन के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा, जिससे अंततः अधिक सुरक्षित, तेज़ी से चार्ज होने वाली तथा अधिक ऊर्जा-कुशल सॉलिड-स्टेट बैटरियों के विकास में सहायता मिलेगी।”

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान भविष्य की तकनीकी प्रगति की आधारशिला है। यह अध्ययन आयन परिवहन संबंधी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारियाँ प्रदान करता है, जो उन्नत ऊर्जा भंडारण सामग्रियों के भविष्य के विकास में उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं। यह कार्य उभरती वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने तथा सतत तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के प्रति आईआईटी रुड़की की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

ठोस पदार्थों में आयन परिवहन तंत्र की समझ को आगे बढ़ाते हुए यह अध्ययन पदार्थ विज्ञान (Materials Science) और ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करता है। यह अपेक्षा की जा रही है कि इसके निष्कर्ष अधिक दक्ष एवं विश्वसनीय ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए जारी वैज्ञानिक प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे।

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