(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। मुहर्रम की दसवीं तारीख़ (यौमे आशूरा) पर हरिद्वार जनपद में हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 जांनिसारों की शहादत को गहरे ग़म, अकीदत और एहतराम के साथ याद किया गया।
गढ़मीरपुर, ज्वालापुर, पिरान कलियर, धनपुरा, घिस्सुपुरा, मंगलौर, बहादराबाद, सलेमपुर, तेलीवाला, हज़ारा, सुल्तानपुर सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार मातमी जुलूस निकाले गए और ताज़ियों को नम आंखों से सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
पूरे जिले में मुहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
“या हुसैन” की सदाओं से गूंजा माहौल
मातमी जुलूसों के दौरान “या हुसैन… या हुसैन…” की सदाओं के बीच अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। जगह-जगह लोगों ने सबीलें लगाकर राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों को शर्बत व पानी वितरित किया।
धर्मगुरुओं ने अपने संबोधन में कहा कि कर्बला की शहादत इंसाफ़, सब्र, कुर्बानी, वफ़ादारी और सच्चाई का ऐसा पैग़ाम है, जो पूरी इंसानियत को ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने अपने परिवार और 72 साथियों के साथ हक़ की राह में शहादत देकर मानवता के लिए अमर मिसाल कायम की।
पुलिस-प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
मुहर्रम के दौरान हरिद्वार पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में पूरे जनपद में सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए।
संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और खुफिया टीमों की तैनाती की गई। गढ़मीरपुर, ज्वालापुर, पिरान कलियर, मंगलौर और अन्य प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा।
वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और जुलूसों की निगरानी की।
शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए सभी धार्मिक कार्यक्रम
सभी मातमी जुलूस निर्धारित मार्गों से शांतिपूर्वक निकले और प्रशासन की निगरानी में सकुशल संपन्न हुए। पूरे आयोजन के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। मुस्लिम समाज के लोगों ने देश, प्रदेश और जनपद में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की।
लोगों ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए इंसानियत, भाईचारे और सच्चाई की राह पर चलने का संकल्प भी दोहराया।
गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बना मुहर्रम
हरिद्वार में मुहर्रम का पर्व एक बार फिर गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया। प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों के आपसी सहयोग से सभी धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए।
खबर लिखे जाने तक विभिन्न क्षेत्रों में ताज़ियों को सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने का सिलसिला जारी रहा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल पूरी तरह तैनात रहा और अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे। :::


























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