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“दरगाह में आखिर किसका संरक्षण? मौ. रफी प्रकरण ने खोली सिस्टम की परतें, अब हाईकोर्ट निगरानी में जांच की उठी मांग!”

(शहजाद अली हरिद्वार) कलियर। पिरान कलियर की चर्चित दरगाह एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। मौ. रफी से जुड़े कथित फर्जी नियुक्ति प्रकरण और लगातार उठ रहे सवालों ने अब पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि किसी नियुक्ति पर पहले से सवाल उठ चुके हैं, तो संबंधित व्यक्ति की सक्रियता आखिर किस आधार पर जारी है? वहीं दस्तावेज सार्वजनिक न होने और जांच की स्थिति स्पष्ट न होने से लोगों के बीच असमंजस और बढ़ गया है।

 “कार्रवाई किस पर और संरक्षण किसे?” — यही सवाल अब कलियर की गलियों से सोशल मीडिया तक गूंज रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जो लोग वीडियो, दस्तावेज या जानकारी सार्वजनिक करने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई की बात होती है, जबकि आरोपों के घेरे में आए लोगों पर कोई स्पष्ट कदम नजर नहीं आता। हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों की अभी तक स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 “मौखिक आदेशों” की चर्चा ने भी प्रशासनिक पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो संबंधित अधिकारी खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे? अब क्षेत्र में यह मांग भी उठने लगी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच माननीय हाईकोर्ट की निगरानी में हो, ताकि सच सामने आ सके।नोट: यह खबर स्थानीय चर्चाओं, शिकायतों और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। सभी पक्षों का पक्ष लिया जाना और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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