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“आपदा की चुनौती और कार्यस्थल पर सम्मान की जिम्मेदारी: हरिद्वार विकास भवन में 70 जिलास्तरीय अधिकारियों को मिला व्यापक प्रशिक्षण, प्रशासनिक क्षमता को मिली नई मजबूती”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। “आपदा प्रबंधन”तथा “कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013”विषयों पर एक दिवसीय आउटरीच प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विकास भवन सभागार, हरिद्वार में सफलतापूर्वक किया गया।यह कार्यक्रम डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल द्वारा हरिद्वार जनपद के जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के कुल 70 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों की क्षमता को आपदा की तैयारी, प्रतिक्रिया तंत्र तथा कार्यस्थल पर लैंगिक समानता एवं सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों के प्रति सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर सुश्री रागिनी तिवारी, पाठ्यक्रम निदेशक,डॉ.आर.एस.टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अवगत करते हुए कि यह प्रशिक्षण अकादमी द्वारा आउटरीच मोड में हरिद्वार जनपद में आयोजित किया गया है, ताकि आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकतम अधिकारियों तक प्रशिक्षण की पहुँच सुनिश्चित की जा सके।उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है,जिसमें पहले दिन आपदा प्रबंधन एवं महिलाओं के कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न तथा दूसरे दिन सूचना अधिकार अधिनियम तथा तीसरे दिन प्रशासनिक सेवाओं/बजट के संबंध में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशिक्षण सत्रों में जनपद स्तर पर आपदा तैयारी एवं रोकथाम हेतु की गई पहलों प्रतिक्रिया के लिए आपदा तैयारी एवं प्राथमिक उपचार, तथा लैंगिक अवधारणाओं एवं कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्रों का संचालन श्रीमती मीरा रावत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, हरिद्वार तथा डॉ. दीपा मेहरा रावत, वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक, उच्च शिक्षा, देहरादून द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान केस स्टडी एवं व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए।

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कार्यक्रम का समापन मूल्यांकन एवं सत्यापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए। प्रतिभागियों द्वारा कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं व्यवहारिक बताया गया, जो जिला प्रशासन की क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

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