(शहजाद अली हरिद्वार) बहादराबाद। जनपद हरिद्वार के आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र, बहादराबाद में सोमवार को तीन दिवसीय जिला स्तरीय आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का शुभारंभ किया गया। शिविर का उद्घाटन जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने किया।
शिविर का उद्देश्य आमजन को आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है।
आयुर्वेद अपनाने का किया आह्वान
उद्घाटन अवसर पर डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति है।
उन्होंने लोगों से आयुर्वेदिक चिकित्सा, संतुलित आहार-विहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर निरोग रहने का संदेश दिया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी स्वास्थ्य सेवाएं
शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया। इस दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल प्रभाकर, शल्य चिकित्सक डॉ. सोरमी सोमकर, क्षारसूत्र विशेषज्ञ डॉ. विजेन्द्र कुशवाह, पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. विकास दुबे तथा डॉ. संजय कुमार ने अपनी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान कीं।
पंचकर्म से लेकर क्षारसूत्र चिकित्सा तक की सुविधा
शिविर में पंचकर्म, अग्निकर्म, जलौकावचारण एवं क्षारसूत्र जैसी आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से रोगियों का परीक्षण एवं उपचार किया गया। साथ ही मरीजों को आयुर्वेदिक जीवनशैली, रोगों की रोकथाम और संतुलित खानपान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई।
नि:शुल्क जांच और औषधि वितरण
शिविर में मरीजों के लिए हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा, रक्तचाप और ईसीजी जांच की भी व्यवस्था की गई। जांच कार्य आयुर्वेदिक परिचारिका कंचना एवं शीतल द्वारा किया गया, जबकि मुख्य फार्मेसी अधिकारी कैलाश भट्ट और फार्मेसी अधिकारी शशि कला ने मरीजों को नि:शुल्क आयुर्वेदिक औषधियों का वितरण किया। शिविर के सफल संचालन में गोविंद, सतीश और रघुवीर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पहले दिन 135 मरीजों ने लिया लाभ
शिविर के पहले दिन कुल 135 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। मरीजों को आयुर्वेदिक परामर्श, पंचकर्म एवं क्षारसूत्र चिकित्सा के साथ आवश्यक औषधियां भी उपलब्ध कराई गईं।
मीडिया प्रभारी एवं आयुष मिशन विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि यह जिला स्तरीय आयुर्वेद चिकित्सा शिविर 30 जून और 1 जुलाई तक जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
































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