(शहजाद अली हरिद्वार) कलियर। दरगाह पिरान कलियर में ‘मौखिक आदेश’ का खेल?
वायरल वीडियो में सुपरवाइजर सिकंदर के बयान से उठे बड़े सवाल
दरगाह पिरान कलियर की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है।
इस बार मामला मौ. रफी नामक व्यक्ति की कथित नियुक्ति और उसे मिले “मौखिक आदेशों” को लेकर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दरगाह के सुपरवाइजर सिकंदर कथित तौर पर यह कहते सुनाई दे रहे हैं
कि “ऊपर से मौखिक ऑर्डर हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद दरगाह प्रशासन और सुपरवाइजरी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मौ. रफी पिछले कुछ समय से दरगाह परिसर में सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है।
आरोप यह है कि उसकी नियुक्ति, जिम्मेदारी या अधिकारों से संबंधित कोई स्पष्ट लिखित आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया, बावजूद इसके उसे लगातार संरक्षण मिलता रहा।
“अगर आदेश लिखित नहीं हैं, तो फिर नियम-कायदे कहां लागू हो रहे हैं?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी धार्मिक संस्था या सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता सबसे जरूरी होती है। यदि किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाती है
तो उसका रिकॉर्ड और आदेश सार्वजनिक होना चाहिए। लेकिन यहां “मौखिक फरमानों” के सहारे पूरा सिस्टम चलाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
“आखिर कौन है वो ‘साहब’ जिसने बिना लिखित आदेश के दिला दी मौ. रफी को एंट्री?”
यह सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
दरगाह क्षेत्र में पहले भी अवैध कब्जों, बाहरी लोगों की दखलअंदाजी और कथित संरक्षण तंत्र को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।
अब वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक चुप्पी भी लोगों के निशाने पर है। मुख्यमंत्री द्वारा भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
“आस्था की जगह पर नियम चलेंगे या मौखिक आदेश?”
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मौ. रफी की नियुक्ति, उसके अधिकार, कार्यकाल और उसे मिले कथित मौखिक आदेशों की निष्पक्ष जांच कर पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।




































Users Today : 49
Users Yesterday : 3383
