(शहजाद अली हरिद्वार)पिरान कलियर। जमीअत उलेमा-ए-हिन्द की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को पिरान कलियर में आयोजित की गई। बैठक में देशभर से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में देश में प्रेम, भाईचारे, आपसी सौहार्द और इंसानियत को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
इस्लाम इंसानियत और पड़ोसियों के हक की शिक्षा देता है
मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लाम धर्म इंसानियत, करुणा और पड़ोसियों के साथ अच्छे व्यवहार का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर जरूरतमंद लोगों की सहायता करना हर इंसान का फर्ज है।
उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि एक हिन्दू परिवार की बेटी विदेश में फंस गई थी। जब परिवार ने उनसे मदद मांगी तो उन्होंने कहा कि वह केवल उनकी नहीं बल्कि उनकी भी बहन है और जमीअत उसके वतन वापसी का पूरा खर्च उठाएगी।
मुसीबत के समय हमेशा आगे आया मुस्लिम समाज
अपने संबोधन में मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत उलेमा-ए-हिन्द और मुस्लिम समाज का इतिहास परोपकार और सेवा से भरा हुआ है।
चाहे दिल्ली में आग की घटनाएं रही हों या पंजाब में आई बाढ़, मुस्लिम समाज ने बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद की मदद की है। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने और इंसानियत की सेवा करने की परंपरा को आगे बढ़ाना समय की जरूरत है।
देशभक्ति और एकता की मिसाल है जमीअत का इतिहास
मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत उलेमा-ए-हिन्द का इतिहास देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जमीअत के उलमाओं ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने ऐसे भारत का सपना देखा था जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हों।
सौहार्द का संदेश लेकर संपन्न हुई बैठक
बैठक में वक्ताओं ने देश में भाईचारा, सामाजिक सद्भाव और आपसी विश्वास को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम को जमीअत की संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ वर्तमान समय में सामाजिक एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच माना गया।
उपस्थित लोगों ने प्रेम, शांति और राष्ट्रीय एकता के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प लिया।


























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